ढाका, (वार्ता) राष्ट्रमंडल पत्रकार संघ (सीजेए) ने बंगलादेश के अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (आईसीटी) द्वारा तीन वरिष्ठ पत्रकारों को जुलाई 2024 के आंदोलन से जुड़े ‘मानवता के खिलाफ अपराध’ के मामले में सुनवाई पूरी होने तक जेल में रखने के आदेश की कड़ी निंदा की है।
इन पत्रकारों में भोर के कागोज के पूर्व संपादक एवं सीजेए के उपाध्यक्ष श्यामल दत्ता, एकात्तर टीवी के प्रबंध निदेशक एवं प्रधान संपादक मोजम्मेल हक बाबू तथा एकात्तर टीवी की मुख्य संवाददाता फरजाना रूपा शामिल हैं।
सीजेए ने कहा कि वह आरोपों के आधार को लेकर विशेष रूप से चिंतित है। आरोपों में 14 जुलाई, 2024 को तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना के गणभवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों की भागीदारी भी शामिल है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, पत्रकारों ने सुश्री हसीना से सवाल करते समय ‘भड़काऊ टिप्पणियां’ की थीं, जिसके बाद उन्होंने प्रदर्शनकारियों को ‘रजाकार’ और ‘रजाकारों के बच्चे’ बताया था।
सीजेए ने कहा कि संवाददाता सम्मेलनों में राजनीतिक नेताओं से सवाल करना, चाहे सवाल कितने भी विवादास्पद क्यों न हों, पत्रकारिता का एक मूल हिस्सा है और यह मानवता के खिलाफ अपराध नहीं हो सकता।
संघ ने चेतावनी दी है कि पत्रकारों के पेशेवर काम के लिए उन पर मुकदमा चलाने के साधन के रूप में आईसीटी का इस्तेमाल बंगालादेश में प्रेस की स्वतंत्रता के लिए ‘बेहद चिंताजनक मिसाल’ कायम करेगा।
संघ ने कहा, ”सीजेए बंगलादेश सरकार और न्यायिक अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने का आह्वान करता है कि पत्रकारिता को अपराध न माना जाए।” संघ ने अधिकारियों से वास्तविक आपराधिक गतिविधियों और अपनी पेशेवर जिम्मेदारियां निभाने वाले पत्रकारों के बीच अंतर करने का आग्रह किया।
न्यायाधिकरण ने सोमवार को श्यामल दत्ता, बाबू और रूपा को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण-2 के सामने पेश किए जाने के बाद जेल भेज दिया। बचाव पक्ष के वकील पलाश चंद्र रॉय ने दलील दी कि दत्ता के खिलाफ मानवता के खिलाफ अपराध के कोई तत्व मौजूद नहीं हैं।
अभियोजक गाजी मोनावर हुसैन तमीम ने आरोप लगाया कि 14 जुलाई के संवाददाता सम्मेलन में पत्रकारों की टिप्पणियों ने उसी दिन बाद में शुरू हुए प्रदर्शनों को बढ़ावा देने में योगदान दिया।
अभियोजक फारुक अहमद ने न्यायाधिकरण को बताया कि मामले के संबंध में तीनों पत्रकारों के खिलाफ 17 अगस्त को पेशी वारंट जारी किए गए थे।
तीनों को सुश्री हसीना और उनकी अवामी लीग के नेतृत्व वाली सरकार को सत्ता से हटाने वाले जन आंदोलन के बाद अगस्त और सितंबर 2024 में पहले ही गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका था। शुरुआत में उन पर जुलाई-अगस्त के प्रदर्शनों के दौरान हुई मौतों से जुड़े सामान्य हत्या के मामले लगाए गए थे।
सीजेए ने कहा कि बाद में उन्हें मानवता के खिलाफ अपराध के आरोप वाले व्यापक आईसीटी मामलों में शामिल कर दिया गया।
इसके अलावा, मीडिया संगठन ने उनकी हिरासत की अवधि और परिस्थितियों को लेकर भी चिंता जताई। उसने कहा कि तीनों पत्रकार पहले ही लंबे समय से हिरासत में हैं। इस दौरान उनके खिलाफ सबूतों को लेकर सवाल उठते रहे हैं और रिपोर्टों के अनुसार, मूल आरोपों को साबित करने वाले आरोपपत्र निर्धारित कानूनी व्यवस्था के तहत दाखिल नहीं किए गए हैं। सीजेए ने उनकी बताई गई चिकित्सा जरूरतों पर भी चिंता जताई। सीजेआई ने कहा कि दत्ता को हृदय संबंधी बीमारी और गंभीर स्लीप एपनिया की पुष्टि हुई है, जिसके लिए जांच और इलाज की जरूरत है। वहीं, बाबू की 2023 के अंत में प्रोस्टेट कैंसर की बड़ी सर्जरी हुई थी और उन्हें कथित तौर पर लगातार चिकित्सा देखभाल की जरूरत है।
संघ ने कार्यवाही, उचित कानूनी प्रक्रिया और विश्वसनीय सबूतों के मानकों की तत्काल समीक्षा की मांग की। संघ ने बंगालदेश के अधिकारियों से पत्रकारों को तब तक रिहा करने का आग्रह किया, जब तक ‘स्वतंत्र रूप से स्थापित किसी आपराधिक अपराध का स्पष्ट और ठोस सबूत’ मौजूद न हो।
सीजेए ने कहा, ”मीडिया की स्वतंत्रता सरकारों की ओर से दी गयी कोई विशेष सुविधा नहीं है। यह लोकतांत्रिक समाज की एक जरूरी शर्त है।”
