जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट के जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाने के आरोप में दर्ज एफआईआर और चार्जशीट निरस्त करने से इनकार करते हुए दायर याचिका खारिज कर दी। दरअसल आवेदक ने बीएनएसएस की धारा 528 के तहत थाना रांझी जिला जबलपुर के अपराध में बीएनएस की धारा 69 के तहत दर्ज प्रकरण और 23 अप्रैल 2026 की चार्जशीट निरस्त करने की मांग की थी।
अभियोजन के अनुसार दोनों करीब 12 वर्ष पहले संपर्क में आए थे। आरोप है कि 19 जुलाई 2015 को आवेदक ने विवाह का आश्वासन देकर संबंध बनाए और इसके बाद करीब 10 वर्षों तक अलग-अलग स्थानों पर इसी आश्वासन पर पीडि़ता का दैहिक शोषण किया। इतना ही नहीं छह मार्च 2026 को विवाह से इनकार करने पर एफआईआर दर्ज हुई। आवेदक ने संबंधों को सहमति से बताते हुए दावा किया कि शिकायतकर्ता ने स्वयं विवाह से इनकार किया और अन्य विवाह के विज्ञापन दिए थे। कोर्ट ने कहा कि ये विवादित तथ्य हैं, जिनका निर्णय ट्रायल में होगा। कोर्ट ने कहा कि एफआईआर और धारा 183 बीएनएसएस के बयान से प्रथम दृष्टया अपराध बनता है। धारा 528 में साक्ष्यों का विस्तृत मूल्यांकन नहीं किया जा सकता। विवाह का आश्वासन शुरू से झूठा था या संबंध सहमति से थे, इसका फैसला ट्रायल में साक्ष्यों के आधार पर होगा।
