
श्री पेजेश्कियान ने कहा कि ईरान गंभीर कठिनाइयों का सामना कर रहा है लेकिन देश दुश्मनों के दबाव के बावजूद मजबूती से डटा रहा है। उन्होंने कहा कि देश एक पुरजोर “आर्थिक, सैन्य और सुरक्षा युद्ध” का सामना कर रहा है जो दुश्मन ने उस पर थोपा है। उन्होंने ईरानियों से एकजुट होकर एक-दूसरे का साथ देने का अनुरोध किया।
उन्होंने 1980-88 में ईरान-इराक के बीच हुए युद्ध का हवाला देते हुए कहा, “हमें मुकद्दस दिफ़ा (पवित्र रक्षण) के समय की तरह ही एक साथ आना होगा और एक-दूजे की मदद करनी होगी। हम पूरी ताकत के साथ इन कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं, लेकिन हम शर्मिंदा हैं कि पुरजोर आर्थिक, सैन्य और सुरक्षा युद्ध के कारण हमारी परेशानियां बरकरार हैं।”
श्री पेजेश्कियान ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नये आर्थिक प्रतिबंध लगाने की धमकियों की ओर इशारा करते हुए कहा कि ईरान दबाव के बावजूद मजबूती से डटा रहा है। उन्होंने कहा कि ईरान के दुश्मन दूसरी सरकारों को उसके साथ व्यापार करने से रोककर इस्लामी गणराज्य को अकेला करना चाहते हैं। उन्होंने ईरान के लोगों से अनुरोध किया कि वह देश के सामने खड़ी विपदा की गंभीरता को पहचानें और आपस में बंटने से बचें, क्योंकि देश के दुश्मन घरेलू परेशानियों का फायदा उठाकर समाज में दरारें पैदा करना चाहते हैं।
श्री पेजेश्कियान ने जून में अमेरिका के साथ हुए समझौता ज्ञापन का भी समर्थन किया। उन्होंने कहा कि यह विस्तृत बातचीत का नतीजा था और ईरान की सेना, सुरक्षा और कार्यपालिका में मौजूद अधिकारियों की सहमति से हासिल हुआ था। उन्होंने प्रक्रिया की आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि यह समझौता ईरान के “सुविधा, गरिमा और बुद्धिमता” के सिद्धांतों के अनुरूप है।
उल्लेखनीय है कि ईरान और अमेरिका ने जून में पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किये थे। इस ज्ञापन का उद्देश्य युद्ध को रोकना और विस्तृत समझौते के लिए ढांचा तैयार करना था। उसके बाद से हालांकि ईरान-अमेरिका के बीच बातचीत रुकी हुई है।
श्री पेजेश्कियान ने अपने मंत्रिमंडल के सदस्यों का धन्यवाद दिया और कहा कि उन्होंने सत्ता संभालने के बाद से निरंतर युद्ध, प्रतिबंध, राजनीतिक दबाव और आंतरिक आर्थिक असंतुलन देखा है। उन्होंने कहा कि सरकार बाहरी दबाव का सामना करते हुए लोगों पर दबाव कम करने और देश के आर्थिक भविष्य की रक्षा करने का प्रयास कर रही है।
उल्लेखनीय है कि श्री पेजेश्कियान ने इससे एक दिन पहले कहा था कि ईरान को ‘शक्ति और गरिमा’ की स्थिति में अमेरिका के साथ इस युद्ध को खत्म करने की कोशिश करनी चाहिए। श्री पेजेश्कियान ने जहां ईरान की दृढ़ता की तारीफ की है, वहीं देश लगातार आर्थिक दबाव से जूझ रहा है। श्री पेजेश्कियान ने कहा है कि आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए राष्ट्रीय एकजुटता अहम होगी।
