इंदौर: स्टेट टाइगर स्ट्राइक फोर्स की कार्रवाई में 30 दुर्लभ कछुए मिलने के बाद जांच अब गिरफ्तार दो आरोपियों तक सीमित नहीं है. वन विभाग यह पता लगाने में जुटा है कि संरक्षित प्रजातियों के ये कछुए इंदौर तक किस रास्ते पहुंचे और इनके पीछे कौन लोग हैं. तीन मोबाइल फोन से मिलने वाली जानकारी इस कड़ी को जोड़ने में अहम मानी जा रही है.
बुधवार को मूसाखेड़ी से पकड़े गए रोहन गौड़ और केशव शर्मा के पास से बुधवार को 14 इंडियन स्टार टॉर्टोइज, 10 इंडियन रूफ्ड टर्टल और छह स्पॉटेड पॉन्ड टर्टल कुल 30 कछुए मिले थे. तीनों ही प्रजातियां संरक्षित हैं. इतनी संख्या में अलग अलग प्रजातियों के कछुए मिलने के बाद वन विभाग अब इनके स्रोत से लेकर संभावित खरीदार तक की जानकारी जुटा रहा है. जांच में सबसे पहले यह पता लगाया जा रहा है कि दोनों आरोपियों ने कछुए किन लोगों से लिए थे. इसके लिए जब्त किए तीन मोबाइल फोन की कॉल हिस्ट्री और अन्य उपलब्ध डिजिटल जानकारी खंगाली जा रही है.
तस्करी में अंतरराज्यीय कनेक्शन की जानकारी भी आई सामने
एसटीएफ द्वारा आरोपियों के संपर्क में रहे लोगों से पूछताछ के जरिए यह कड़ी आगे बढ़ाई जा रही है कि कछुओं की मांग किसने की थी और उन्हें आगे कहां पहुंचाया जाना था. पूछताछ में अंतरराज्यीय कनेक्शन की जानकारी भी सामने आई है. इसके बाद वन विभाग दूसरे राज्यों से जुड़े संपर्कों की भी पड़ताल कर रहा है. जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि क्या दोनों आरोपी खुद कछुए जुटा रहे थे या उन्हें किसी दूसरे व्यक्ति से खेप मिलती थी. इसके अलावा इससे पहले भी इस तरह की खरीद-फरोख्त किए जाने की जानकारी जुटाई जा रही है.
सामने आए प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका जांची जा रही
वन विभाग की एसटीएफ टीम अब संभावित खरीदारों की पहचान पर भी काम कर रही है. यदि मोबाइल से मिले संपर्कों और आरोपियों से पूछताछ में सामने आए नामों की पुष्टि होती है तो तस्करी की अगली कड़ी तक पहुंचना आसान होगा. जांच में सामने आने वाले प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका अलग अलग स्तर पर जांची जा रही है. दोनों आरोपी अभी रिमांड पर है उनसे पूछताछ की जा रही है. एसटीएफ कछुओं के स्रोत और उन्हें आगे देने वाले लोगों की जानकारी जुटा रही है. आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच के साथ अंतरराज्यीय संपर्कों को भी खंगाला जा रहा है
