
जबलपुर। हाईकोर्ट ने आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में 23 वर्षीय युवती विशाखा को अग्रिम जमानत दे दी। अधिवक्ता शांतनु तिवारी ने युवती की ओर से पैरवी करते हुए कहा कि वह निर्दोष है, उसने मृतक को जान से मारने की धमकी नहीं दी और वह बैतूल की स्थायी निवासी है। शासन की ओर से जमानत का विरोध किया। जस्टिस अजय कुमार निरंकारी ने बीएनएस की धारा 45 में उकसावे के लिए आवश्यक तत्वों का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रथमदृष्टया आवेदिका के विरुद्ध धारा 45 और 108 के आवश्यक तत्व नहीं बनते। कोर्ट ने बिना मामले के गुण-दोष पर टिप्पणी किए अग्रिम जमानत मंजूर कर दी। गिरफ्तारी होने पर 50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र और समान राशि के एक सक्षम जमानतदार पर रिहाई के निर्देश दिए। जांच में सहयोग नहीं करने पर जमानत रद्द की जा सकती है।
मामला बैतूल के कोतवाली थाना क्षेत्र में दर्ज अपराध से जुड़ा है। अभियोजन के अनुसार मृतक आकाश राठौर ने जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या की थी। मर्ग जांच के दौरान परिजनों ने बताया कि तबीयत बिगडऩे पर उसे बैतूल अस्पताल ले जाया गया, जहां से नागपुर रेफर किया गया। रास्ते में आकाश ने कथित रूप से बताया कि युवती ने उसे दुष्कर्म के झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी थी। इसके बाद एफआईआर दर्ज हुई। पोस्टमार्टम में जहरीला पदार्थ खाने से अंगों के काम करना बंद होना मृत्यु का कारण बताया गया।
