सिलीगुड़ी, (वार्ता) पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद पहली बार, रेलवे की जमीन से बिना पुनर्वास बेदखली के विरोध में बुधवार को सैकड़ों लोगों ने सिलीगुड़ी स्थित उत्तरकन्या तक मार्च निकाला।
यह विरोध प्रदर्शन ‘ग्रेटर सिलीगुड़ी सिटिजंस कमेटी’ ने आयोजित किया था। रेलवे के न्यू जलपाईगुड़ी, सिलीगुड़ी जंक्शन, सिलीगुड़ी और बागडोगरा रेलवे स्टेशनों के आसपास की बस्तियों, बाजारों और दुकानों में रहने वाले लोगों को बेदखली का नोटिस जारी किये जाने के बाद इस कमेटी का गठन हुआ था।
कमेटी ने नागरिकों के अधिकारों, आजीविका और बच्चों के अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए एक ही मांग रखी – “बिना पुनर्वास कोई बेदखली नहीं।”
प्रदर्शनकारियों ने पहले न्यू जलपाईगुड़ी स्थित एडीआरएम कार्यालय और फिर एनजेपी थाना में ज्ञापन सौंपा। इसके बाद वे मिनी सचिवालय ‘उत्तरकन्या’ की ओर बढ़े, जहां पुलिस ने जुलूस को उत्तरकन्या से लगभग एक किलोमीटर पहले ही रोक दिया।
इसके बाद छह प्रतिनिधियों को आगे जाकर सरकारी अधिकारियों को ज्ञापन सौंपने की अनुमति दी गयी।
कमेटी के सदस्य और भाकपा (माले) लिबरेशन के नेता अभिजीत मजूमदार ने कहा कि लगभग एक लाख लोग पिछले दो से पांच दशकों से इस इलाके में रह रहे हैं और उन्हें बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के अचानक बेदखल नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन संविधान के अनुच्छेद 21 और उच्चतम न्यायालय के एक फैसले पर आधारित है, जिसमें बेदखली के मामलों में पुनर्वास को महत्वपूर्ण पहलू माना गया है।
