
ग्वालियर। ग्वालियर संगीत व शौर्य की धरा है। ग्वालियर में शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा रही है। संगीत का आधार भक्ति है। भक्ति के बिना शास्त्रीय संगीत अधूरा होता है। शास्त्रीय संगीत संप्रदायों से भी ऊपर है। इस आशय के विचार राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष जयभान सिंह पवैया ने व्यक्त किए। पवैया, राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के 19वे स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।
बुधवार को संगीत एवं कला विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित हुए स्थापना दिवस समारोह के उदघाटन अवसर पर राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष पवैया ने कहा कि दुनिया के ज्यादातर देश भू-राजनैतिक राष्ट्र हैं। पर अपना देश भू-सांस्कृतिक राष्ट्र है। यही कारण है कि एक हजार साल के कठिन संघर्ष के बावजूद हमारी संस्कृति व कला ने भारत को जीवित रखा।
समारोह के अध्यक्ष पवैया ने राजा मानसिंह तोमर संगीत एवं कला विश्वविद्यालय में स्थापना दिवस समारोह के उपलक्ष्य में लगाई गई कला प्रदर्शनी की सराहना करते हुए कहा कि यहां आकर ऐसा अनुभव हो रहा है कि हम सब किसी कला के मंदिर में खड़े हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि यह विश्वविद्यालय निश्चित ही देश की सांस्कृतिक धरोहर बनेगा। साथ ही भरोसा दिलाया कि सभागार के निर्माण सहित विश्वविद्यालय के सम्पूर्ण विकास में उनकी ओर से हर संभव सहयोग मिलेगा। श्री पवैया ने कार्यक्रम में मौजूद विद्यार्थियों का आह्वान किया कि सदैव सकारात्मक रहें। सकारात्मकता व आत्मविश्वास के आगे कुछ भी असंभव नहीं है।
कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि जीवाजी विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राजकुमार आचार्य ने कहा कि भले ही आज मोबाइल फोन का युग है, लेकिन संगीत का युग हमेशा रहेगा। हर समस्या का समाधान संगीत में छिपा है। व्यक्ति कितना भी तनाव में क्यों न हो, संगीत की मधुर धुन उसे मानसिक शांति प्रदान करती है।
विश्वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे ने विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन व सरस्वती वंदना के साथ हुआ।
आरंभ में पवैया सहित अन्य अतिथियों ने ललित कला संकाय के विद्यार्थियों द्वारा लगाई गई कला प्रदर्शनी का अवलोकन किया। प्रदर्शनी में चित्रों के माध्यम से देश की कला और सांस्कृतिक विरासत को प्रस्तुत किया गया। अतिथियों ने विश्वविद्यालय के पुस्तकालय का उदघाटन भी किया।
कार्यक्रम में पूर्व मंत्री ध्यानेन्द्र सिंह, विश्वविद्यालय कार्य परिषद के सदस्य चंद्रप्रताप सिंह सिकरवार, अपर संचालक उच्च शिक्षा डॉ. कुमार रत्नम, विश्वविद्यालय के कुल सचिव डॉ. आशुतोष खरे, कनवर मंगलानी, धीरेन्द्र चंदेल, विद्या परिषद सदस्य अशोक आनंद, छात्र कल्याण अधिष्ठाता डॉ. पारुल दीक्षित, डॉ. अंजना झा, डॉ. मनीष करवड़े, डॉ. हिमांशु द्विवेदी, डॉ. संजय सिंह व डॉ. गौरी प्रिया सहित विश्वविद्यालय के गुरुजन, विद्यार्थी और बड़ी संख्या में कला रसिक उपस्थित रहे।
*सुर, लय और अभिनय की त्रिवेणी में सजी महाराजा मानसिंह की अमर गाथा*
अभिनय, गायन और भरतनाट्यम के अद्भुत संगम ने मंच पर इतिहास को सजीव कर दिया। स्थापना दिवस समारोह की सबसे प्रभावशाली प्रस्तुति महाराजा मानसिंह तोमर के जीवन पर आधारित नाट्य मंचन रही, जिसने दर्शकों को कला, संस्कृति और इतिहास के ऐसे लोक में पहुँचा दिया, जहाँ शौर्य और सौंदर्य एक साथ साकार होते दिखाई दिए।
कुलगुरु प्रो. स्मिता सहस्त्रबुद्धे की संकल्पना पर तैयार इस भव्य नाट्य प्रस्तुति का निर्देशन थियेटर विभागाध्यक्ष डॉ. हिमांशु द्विवेदी, डॉ. पारुल दीक्षित और भरतनाट्यम विभागाध्यक्ष डॉ. गौरीप्रिया ने किया। लगभग 50 कलाकारों ने 50 मिनट की प्रस्तुति में महाराजा मानसिंह तोमर के जन्म से लेकर उनके जीवन के विभिन्न आयामों को मंच पर जीवंत कर दिया।
