
वाशिंगटन, 15 अगस्त (वार्ता) अमेरिकी विमानवाहक पोत यूएसएस अब्राहम लिंकन आठ महीने से अधिक समय समुद्र में बिताने के बाद अब स्वदेश लौट रहा है, लेकिन उसकी लंबी तैनाती, पोत पर कथित खराब परिस्थितियों और नौसैनिकों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर उठे सवालों का असर पेंटागन पर लंबे समय तक बना रहने की संभावना है। अब्राहम लिंकन 265 दिनों से अधिक समय तक तैनात रहा। नवंबर में बंदरगाह से रवाना होने के बाद जनवरी में अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान बढ़ाये जाने के बीच उसे मध्य पूर्व की ओर भेज दिया गया था। पेंटागन और अमेरिकी नौसेना ने पोत पर परिस्थितियों को लेकर सामने आयी कुछ रिपोर्टों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया या भ्रामक बताया है। सामान की कमी, डाक व्यवस्था में परेशानी, पाइपलाइन संबंधी समस्याओं, बंदरगाहों पर सीमित ठहराव और नौसैनिकों के बढ़ते मानसिक तनाव की खबरों ने सांसदों और सैन्यकर्मियों के परिजनों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। अब नौसेना अब्राहम लिंकन की जगह यूएसएस जॉर्ज वाशिंगटन को पश्चिम एशिया भेज रही है। इस बदलाव से विमानवाहक पोत की तैनाती को लेकर उठे सवालों के खत्म होने की संभावना कम है।नौसेना की पूर्व कार्यवाहक फोर्स रेजिलिएंसी निदेशक एंड्रिया गोल्डस्टीन ने इसे ‘अभूतपूर्व’ बताया। उन्होंने कहा कि समस्या केवल यह नहीं है कि तैनाती सामान्य अवधि से लंबी हो गयी, बल्कि यह भी है कि इसे लगातार बढ़ाया गया और नौसैनिकों को यह पता नहीं था कि वे कब घर लौटेंगे।
उन्होंने कहा कि इस तरह की अनिश्चितता का मानसिक असर पड़ता है। तैनाती के दौरान दो नौसैनिकों के समुद्र में गिरने की खबरों के बाद भी इस मुद्दे पर ध्यान बढ़ा। अमेरिकी केंद्रीय कमान ने तीन अगस्त को इनमें से एक घटना की पुष्टि करते हुए कहा था कि नौसैनिक को “जल्दी और सुरक्षित” बचा लिया गया। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को पोत पर मौजूद नौसैनिकों के परिजनों की चिंताओं को खारिज किया। जब उनसे पूछा गया कि क्या परिवार के सदस्य पोत की परिस्थितियों को लेकर चिंतित हैं तो उन्होंने कहा, “नहीं।” यह पूछे जाने पर कि क्या तैनाती बहुत लंबी हो गयी है, श्री ट्रंप ने कहा कि ऐसा नहीं है और यह “लगभग पर्याप्त लंबी भी नहीं” हुई है।नौसेना के कार्यवाहक सचिव हंग काओ ने कहा कि अब्राहम लिंकन की वापसी नियोजित रोटेशन का हिस्सा है और उन्होंने इसकी तैनाती बढ़ाने के फैसले का बचाव किया। उन्होंने कहा कि युद्ध की स्थिति में सबसे कठिन पहलुओं में से एक यह है कि सैनिकों को खतरे में डालने के अलावा, सर्वोत्तम योजना और संवाद के बावजूद परिस्थितियों में बदलाव और अनिश्चितता बनी रहती है। श्री काओ ने स्वीकार किया कि नौसैनिकों और मरीन को उनकी सीमाओं तक काम करना पड़ा, लेकिन उन्होंने कहा कि उन्होंने अपनी जिम्मेदारियां निभाना जारी रखा। उन्होंने कहा, “इसमें कोई संदेह नहीं कि हमारे युवा पुरुषों और महिलाओं को उनकी सीमाओं तक धकेला गया, लेकिन वे कभी टूटे नहीं।” रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी पोत की परिस्थितियों को लेकर सामने आयी रिपोर्टों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें “पूरी तरह गलत तरीके से पेश किया गया” है। उन्होंने कहा कि कुछ तैनातियां दूसरों की तुलना में लंबी होती हैं और उन्होंने पोत पर तैनात नौसैनिकों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त किया।पेंटागन के इन आश्वासनों से कुछ सैन्यकर्मी परिवार और सांसद संतुष्ट नहीं हुए हैं। पिछले सप्ताह सैन डिएगो में नौसेना अधिकारियों के साथ हुई एक बैठक में करीब 200 सैन्यकर्मियों के परिजनों ने अपनी चिंताएं सीधे श्री काओ और अन्य अधिकारियों के सामने रखीं। एक सैन्यकर्मी की पत्नी ने सैन्य नेतृत्व और परिवारों के बीच “टूटे हुए भरोसे” की शिकायत की। एक अन्य महिला ने अधिकारियों को बताया कि उसके पति ने उसे संदेश भेजकर कहा था कि वह उम्मीद करता है कि अगली सुबह उसकी आंख न खुले।
तैनाती के दौरान नौसैनिकों को सामान्य तौर पर मिलने वाले बंदरगाह पर ठहरने के अवसर भी काफी कम रहे। ऐसे ठहराव समुद्र में लंबे समय तक काम करने के बाद आराम और मानसिक राहत के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसके बजाय विमानवाहक पोत का स्ट्राइक ग्रुप क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अभियानों में लगातार सक्रिय रहा। अब यह मुद्दा अमेरिकी कांग्रेस तक भी पहुंच गया है। सांसदों ने अब्राहम लिंकन की लंबी तैनाती और इसका नौसैनिकों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर पेंटागन से जवाब मांगा है। हाउस आर्म्ड सर्विसेज की सीपावर एंड प्रोजेक्शन फोर्सेज उपसमिति में शीर्ष डेमोक्रेट सांसद जो कोर्टनी ने लंबे और अत्यधिक कठिन तैनाती कार्यक्रमों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि इस तरह की तैनाती विमानवाहक पोतों और युद्धपोतों की क्षमता को प्रभावित करती है तथा नौसैनिकों पर अतिरिक्त दबाव डालती है। हाउस एप्रोप्रिएशंस की रक्षा उपसमिति की शीर्ष डेमोक्रेट सांसद बेट्टी मैक्कॉलम ने कहा कि वह अब्राहम लिंकन पर भोजन की कमी, साफ-सफाई की समस्याओं और बंदरगाहों पर पर्याप्त ठहराव नहीं होने की रिपोर्टों को लेकर जवाब मांग रही हैं।
उन्होंने कहा, “यह सफलता की कहानी नहीं है। यह नेतृत्व की विफलता है।”
