
काबुल, अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी को शुक्रवार 15 अगस्त 2026 को 5 साल पूरे हो गए। 15 अगस्त 2021 को अमेरिकी सेनाओं की वापसी के बाद तालिबान ने बिना बड़े विरोध के काबुल पर कब्जा कर लिया था।
तालिबान इस दिन को “आजादी, सुरक्षा और स्वाभिमान” के जश्न के रूप में मना रहा है। वहीं मानवाधिकार संगठन और आम नागरिक कड़े नियमों और आर्थिक तंगी से परेशान हैं।
*काबुल की सड़कों पर जश्न*
काबुल में तालिबान समर्थक पुरानी अमेरिकी गाड़ियों और हमवी के काफिले के साथ जश्न मनाते दिखे। शहर की दीवारों पर आजादी को “कौमी गरिमा और फख्र की निशानी” बताने वाले नारे लिखे गए। प्रशासन ने इस मौके पर क्रिकेट और अन्य खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन भी किया।
*सुरक्षा के दावे, बेरोजगारी की मार*
तालिबान समर्थक सुरक्षा व्यवस्था में सुधार और नई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की तारीफ कर रहे हैं। काबुल की 20 वर्षीय विश्वविद्यालय छात्रा पीरूज मिर्जाई ने कहा, “सरकार ने सुरक्षा तो दी है, लेकिन युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती नौकरियों की भारी कमी है।”
वर्ल्ड बैंक के मुताबिक देश की आर्थिक वृद्धि दर 4.8% है, लेकिन प्रति व्यक्ति GDP में बड़ी गिरावट आई है। पिछले 3 साल में पाकिस्तान और ईरान से 60 लाख से ज्यादा शरणार्थी लौटे हैं। रूस के अलावा किसी देश ने तालिबान सरकार को मान्यता नहीं दी है।
*महिलाओं और मीडिया पर कड़ी पाबंदियां*
तालिबान ने महिलाओं के पार्क जाने, नौकरी और 12 साल से अधिक उम्र की लड़कियों की पढ़ाई पर पूरी रोक लगा रखी है। संयुक्त राष्ट्र की फियोना फ्रेजर के अनुसार लोग “दमघोंटू पाबंदियों” को झेलने पर मजबूर हैं। एक 23 वर्षीय युवती ने कहा, “खुद को 500 साल पुरानी जीवित लाश जैसा महसूस करती हूं।”
कमेटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स ने प्रेस की आजादी पर तालिबान की कार्रवाई की आलोचना की है। पत्रकारों को जेल और मारपीट के कारण कई मीडियाकर्मी देश छोड़ चुके हैं।
*पाकिस्तान से बढ़ा तनाव, बढ़ी भुखमरी*
पड़ोसी पाकिस्तान के साथ तालिबान के कूटनीतिक संबंध कड़वे हुए हैं और सीमा पर सैन्य झड़पें बढ़ी हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवीय सहायता में कटौती के कारण आम अफगानों के सामने गरीबी और भुखमरी का संकट गहरा गया है।
