नयी दिल्ली, 14 अगस्त (वार्ता) बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के कामकाज में बड़े ढांचागत सुधारों की मांग को लेकर उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर की गयी है।
याचिका में बीसीआई अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के कार्यकाल की समय-सीमा तय करने, विभिन्न राज्यों एवं क्षेत्रों को समान प्रतिनिधित्व देने और वित्तीय तथा नियामक जवाबदेही मजबूत करने की गुहार लगाई गई है।
अधिवक्ता एम. वरदान की इस याचिका में अधिवक्ता अधिनियम की धारा 4(3) के प्रावधान को चुनौती दी गयी है। यह प्रावधान बीसीआई सदस्य को उसका उत्तराधिकारी चुने जाने तक पद पर बने रहने की अनुमति देता है। याचिकाकर्ता ने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के पदों के लिए दो वर्ष का निश्चित कार्यकाल तय करने की मांग की है। इसके अलावा,याचिका में यह भी मांग की गयी है कि किसी भी व्यक्ति को अपने पूरे जीवनकाल में (चाहे लगातार हो या अलग-अलग) तीन से अधिक बार अध्यक्ष या उपाध्यक्ष का पद संभालने की अनुमति न दी जाये।
बीसीआई नेतृत्व में भौगोलिक विविधता सुनिश्चित करने के लिए याचिका में मांग की गयी है कि अध्यक्ष पद के लिए एक पारदर्शी और न्यायसंगत रोटेशनल तंत्र बनाया जाये, ताकि देश के विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को बीसीआई के शीर्ष पद पर सेवा करने का अवसर मिल सके।
याचिका के अनुसार बीसीआई के मौजूदा अध्यक्ष नवंबर 2014 से इस पद पर बने हुए हैं, जबकि देश के 28 राज्यों में से 20 राज्यों के प्रतिनिधियों को पिछले तीन दशकों में इस राष्ट्रीय नियामक संस्था के अध्यक्ष पद पर बैठने का मौका नहीं मिला है। याचिका में कहा गया है कि केवल चुनाव होना ही एक सार्थक लोकतंत्र का प्रमाण नहीं हो सकता, यदि वही व्यक्ति प्रमुख पदों पर बने रहें।
