![]()
इंदौर. जिले से महिलाओं और बच्चों के लापता होने के मामलों पर हाई कोर्ट ने सरकार से अब तक की कार्रवाई का हिसाब मांगा है. 2021 से अब तक कितने लोग लापता हुए, कितनों को तलाश लिया और कितने अब भी नहीं मिले, सरकार को इसका पूरा ब्योरा देना होगा. कोर्ट ने लंबित मामलों में पुलिस और प्रशासन की ओर से की जा रही तलाश की जानकारी भी मांगी है.
गुरुवार को इंदौर खंडपीठ की दो सदस्यीय पीठ ने लापता महिलाओं और बच्चों से जुड़े जनहित के मामले की सुनवाई की. याचिका में लापता होने के मामलों में देरी से कार्रवाई और इनके अद्यतन आंकड़े सामने नहीं आने का मुद्दा उठाया है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया. अब सरकार को वर्ष 2021 से लेकर अब तक का आंकड़ा अदालत के सामने रखना होगा. इसमें लापता महिलाओं और बच्चों की संख्या के साथ बरामद लोगों की संख्या और ऐसे मामलों का भी विवरण देना होगा, जिनमें अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है. ऐसे मामलों में पुलिस ने क्या कदम उठाए, इसकी जानकारी भी मांगी गई है. याचिका में लापता लोगों की तलाश के लिए विशेषज्ञों की समिति बनाने की मांग की गई है. साथ ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा ऐसे मामलों की नियमित समीक्षा, मानव तस्करी निरोधक इकाई को मजबूत करने और पुलिस सहित संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय की मांग की गई है. याचिकाकर्ता का तर्क है कि लापता महिलाओं और बच्चों के मामले केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं हैं. लंबे समय तक उनका पता नहीं चलना उनकी सुरक्षा और गरिमा से जुड़ा गंभीर विषय है. इसी आधार पर लंबित मामलों की जांच और तलाश की प्रभावशीलता की भी समीक्षा की मांग की गई है.
