
ग्वालियर: शासकीय उत्कृष्ट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय क्रमांक-01, मुरार में शुक्रवार को ‘भारत विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के अवसर पर एक विशेष प्रार्थना सभा एवं स्मृति कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत विद्यालय के प्रार्थना स्थल पर राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम’ के सस्वर गायन के साथ हुई।
स्मार्ट क्लासरूम/इंटरैक्टिव पैनल के माध्यम से दिखाई गई वृत्तचित्र
प्रार्थना सभा के पश्चात विद्यालय के प्रत्येक अध्ययन कक्ष में विद्यार्थियों को इंटरैक्टिव पैनल (डिजिटल डिस्प्ले) के माध्यम से 1947 की तात्कालिक घटनाओं, विस्थापन के दृश्यों और मानवीय त्रासदी पर आधारित सजीव डॉक्युमेंट्री व चित्रों का प्रदर्शन किया गया, जिससे भावी पीढ़ी इतिहास के इस भयावह अध्याय से रूबरू हो सके।
शिक्षक एवं स्टाफ की उपस्थिति
इस गरिमामय एवं भावुक कार्यक्रम में विद्यालय के वरिष्ठ शिक्षक एवं स्टाफ सदस्य प्रमुख रूप से
अवधेश कुमार पांडेय,डॉ. उमेश कुमार पाठक, धर्मपाल सिंह बघेल,पी. पी. सोलंकी,मुकेश कुमार जाटव,ओ. पी. गोयल,ऋचा अग्रवाल,अनु परमार,डॉ. दीप्ती गौड़,राघवेंद्र प्रताप सिंह,सीमा गुप्ता,के. के. शर्मा एवं समस्त विद्यालय परिवार उपस्थित रहे।
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”राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और धार्मिक अंधता ने देश को खंडित किया” – प्राचार्य गर्ग
सभा को संबोधित करते हुए संस्था के प्राचार्य प्रबुद्ध गर्ग ने विभाजन के दर्दनाक इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा ”14 अगस्त 1947 का दिन भारतीय इतिहास का वह काला पृष्ठ है, जब धार्मिक कुत्सित राजनीति के कारण मां भारती को खंडित कर तीन टुकड़ों में बांट दिया गया। जिन्ना की धार्मिक अंधता के चलते पश्चिमी और पूर्वी पाकिस्तान के रूप में नए राज्य बनाए गए। जो लोग सदियों से अपनी संस्कृति, परंपराओं और रीति-रिवाजों के साथ अपनी मातृभूमि पर जीविका अर्जन कर रहे थे, उनके लिए यह केवल एक सीमा रेखा का खिंचना नहीं था, बल्कि करोड़ों दिलों, हंसते-खेलते परिवारों और सदियों पुरानी सांस्कृतिक विरासत का निर्मम बंटवारा था।”
उन्होंने आगे कहा कि इस विभाजन के दौरान लाखों निर्दोष लोगों को असीम वेदना, विस्थापन और प्राणों की आहुति देनी पड़ी। संबोधन के उपरांत उपस्थित समस्त शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने दो मिनट का मौन रखकर विभाजन की विभीषिका में जान गंवाने वाले शहीदों व पीड़ितों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
