
उन्होंने लिखा, “खनन अधिनियम में संशोधन करने वाला विधेयक पारित होने पर सरकार को बधाई। जैसा कि हम जानते हैं, देश के भूगर्भ में खनिज संसाधनों की अपार संभावनाएं हैं और सरकार इन संभावनाओं का दोहन करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। कानून में किये गये बदलाव कारोबार करना आसान बनाएंगे। इससे उत्पादन बढ़ाने, बड़े पैमाने पर रोजगार पैदा करने और देश को आत्मनिर्भर बनाने में मदद मिलेगी। ” श्री अग्रवाल का कहना है कि संशोधनों का उद्देश्य खनिजों के अन्वेषण और विकास के लिए नियामकीय व्यवस्था को अधिक सरल तथा अनुकूल बनाना है। इसके तहत मौजूदा खनन पट्टाधारकों को अपने पट्टों में अतिरिक्त खनिजों को शामिल करने के लिए आवेदन करने में अधिक लचीलापन मिलेगा।
महत्वपूर्ण खनिजों की बढ़ती मांग को देखते हुए यह सुधार खासा अहम माना जा रहा है। विनिर्माण, ऊर्जा संक्रमण और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला के लिए इन खनिजों की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में अनुकूल खनन नीति देश में घरेलू खनिज उत्पादन बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने में मददगार हो सकती है। वेदांता चेयरमैन ने देश की बढ़ती औद्योगिक जरूरतों और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य के बीच खनिज क्षेत्र के लिए किये गये इन सुधारों को देश की खनिज सुरक्षा मजबूत करने और घरेलू संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है।
