भारत का रूसी तेल आयात रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा, पहली बार कुल हिस्सेदारी 52% के पार; खाड़ी देशों की निर्भरता में आई भारी गिरावट

नई दिल्ली,  ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2026 में भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी बढ़कर 52 प्रतिशत हो गई है। चार साल पहले यह आंकड़ा मात्र 15 प्रतिशत था, जबकि अब भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर रूस पर निर्भर है।

खाड़ी देशों की घटती हिस्सेदारी

इस बदलाव के चलते सऊदी अरब और यूएई जैसे खाड़ी देशों से भारत का आयात काफी कम हो गया है। साल 2022 में इन देशों की हिस्सेदारी 55 प्रतिशत से अधिक थी, जो अब घटकर 30 प्रतिशत से भी कम रह गई है। भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री रास्तों की असुरक्षा ने रूस को एक प्रमुख तेल आपूर्तिकर्ता बना दिया है।

अमेरिकी प्रतिबंधों की चुनौती और प्रभाव

रूस पर बढ़ती यह निर्भरता अमेरिका के लिए चिंता का विषय बनी हुई है, जिससे भारतीय व्यापार पर नए टैक्स और जुर्माने का खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यदि भारत रूसी तेल आयात बंद करता है, तो देश में ईंधन की कीमतें बढ़ने और आम जनता पर महंगाई का भारी बोझ पड़ने की आशंका है।

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