हैदराबाद, भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने बॉन्ड बाजार में जोखिम को आसान बनाने के लिए छह अलग-अलग रंगों वाले ‘क्रेडिट रिस्क-ओ-मीटर’ का प्रस्ताव दिया है। आयरिश ग्रीन से लेकर रेड रंग तक का यह स्केल निवेशकों को पलभर में निवेश के खतरे को समझने में मदद करेगा।
कंपनियों और प्लेटफॉर्म्स के लिए कड़े नियम
सेबी के नए नियमों के तहत, बॉन्ड जारी करने वाली कंपनियों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स को अपने विज्ञापनों और ऐप्स पर इस मीटर को प्रमुखता से दिखाना होगा। यदि किसी बॉन्ड की एक से अधिक रेटिंग है, तो सबसे खराब रेटिंग के आधार पर रंग तय किया जाएगा और 24 घंटे के भीतर इसे अपडेट करना अनिवार्य होगा।
निवेशकों को मिलेगी स्पष्ट जानकारी
तकनीकी रेटिंग को न समझ पाने वाले आम निवेशक अब इस रंगीन कोडिंग के जरिए आसानी से समझ सकेंगे कि उनका पैसा कितना सुरक्षित है। हालांकि, यह मीटर केवल क्रेडिट जोखिम को दर्शाएगा, बाजार के उतार-चढ़ाव को नहीं।

