आजीवन कारावास से दंडित तीन व्यक्ति दोषमुक्त

जबलपुर: हत्या के अपराध में आजीवन कारावास की सजा से दंडित एक आरोपी को अपील वापस लेने के कारण हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने अपील की सुनवाई के बाद तीन आरोपियों की सजा को निरस्त करते हुए दोषमुक्त कर दिया। हाईकोर्ट जस्टिस विवेक अग्रवाल तथा जस्टिस एक के सिंह ने जेल में दस साल सात माह से निरूध्द अपीलकर्ता को आवश्यकता नही होने पर तत्काल रिहा करने के आदेश जारी किये है।
अभियोजन के अनुसार दमोह जिले के तेजगढ थानान्तर्गत निवासी गोटीराम अहिरवाल ईंटें बनाने का काम करते थे। गोटीराम 31 मार्च 2008 को अपने पड़ोसी परसूराम से उधारी के पांच हजार रूपये मांगने पर उसने अपने साथी दशरथ अहिरवाल, बसोरी अहिरवाल और राजू अहिरवाल ने उस पर कुल्हाड़ी व डंडे से हमला कर दिया। जिसके कारण वह जमीन में गिर गया था। उसके तत्काल राजगढ़ थाने ले जाया गया था। पुलिस ने घायल की रिपोर्ट में एफआईआर दर्ज की उसके उपचार के लिए अस्पताल भेज दिया था। अस्पताल में उपचार के दौरान घटना के तीन दिन बाद उसकी मौत हो गयी। किसी कारणवश उसके डाइंग डिक्लेरेशन रिकॉर्ड नही किये गये।
युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि ट्रायल कोर्ट के रिकॉर्ड अनुसार अभियोजन पक्ष का मामला यह है कि जब आरोपियों ने गोटी पर हमला किया तो वह गिर गया और मदद के लिए चिल्लाया। उसकी चिल्लाने की आवाज सुनकर लोग एकत्रित हुए थे। गोटीराम की चीख सुनकर घटनास्थल पर आने वाले सभी लोगों को हमले का असली चश्मदीद गवाह नहीं माना जा सकता। ऐसे गवाह का घर घटना स्थल से लगभग 50 से 60 फीट दूर था।
मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार जब घायल व्यक्ति को उपचार के लिए लाया गया वह बोलने की स्थिति में परंतु यह नहीं लिखा है कि मरीज होश में था। उसका ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन रिकॉर्ड नही की गयी। एमएलसी रिपोर्ट के अनुसार उसके डाइंग डिक्लेरेशन का इंतजाम करने की सलाह दी गई थी। आम तौर पर ऐसा तब किया जाता है जब मरीज की हालत बहुत गंभीर हो और उसके अधिक समय तक जीवित रहने की उम्मीद नही होती है। जिसके कारण इस बात पर गंभीर संदेह पैदा होता है कि वह होश में था और बोलने की हालत में था। पुलिस के द्वारा अस्पताल में धारा 161 के तहत बयान दर्ज करने से पहले प्रभारी डॉक्टर से कोई प्रमाण-पत्र नहीं लिया गया। जिससे उसकी बयान देने की उचित चिकित्सीय स्थिति ज्ञात हो सके। पुलिस के द्वारा कार्यकारी मजिस्ट्रेट से मरणासन्न बयान दर्ज कराने का कोई प्रयास किया। पुलिस के द्वारा आरोपियो से जब्त हथियार को पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर व ट्रायल कोर्ट के समक्ष पेष नही किया गया।
मेडिकल रिपोर्ट में मौत का कारण अधिक खून बहने के कारण दिल की धड़कन का अचानक रुकना बताया गया है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार मृतक के सिर पर कोई चोट नहीं मिली। गाल और छाती में आई चोट किसी कठोर सतह पर गिरने या उससे टकराने से लग सकती थी। किसी कठोर और धारदार चीज से लगी कोई चोट नहीं मिली। मेडिकल रिपोर्ट में उसके सिर में चोट का उल्लेख किया गया है।
हाईकोर्ट में दायर अपील परशुराम की तरफ से 8 अप्रैल 2025 अपील वापस ले ली गयी थी। जिसके कारण युगलपीठ ने सिर्फ तीन अपीलकर्ताओ की अपील की सुनवाई करते हुए उनके पक्ष में राहतकारी आदेश जारी किये । युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि अभियोजन पक्ष अपीलकर्ताओं के खिलाफ आरोप साबित करने में नाकाम रहा है। युगलपीठ ने अपीलकर्ता दशरथ के विगत दस साल 7 माह से जेल में है। किसी अन्य मामले में आवश्यकता नही होने पर उसे तत्काल रिहा करने के आदेश जारी किये है।

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