भोपाल। शाहपुरा स्थित मोर वन में मानसून के साथ ही मोरों का प्रजनन काल भी चल रहा है। इस दौरान मोरनियां ऊंची घास के बीच अंडे देती हैं, जो उनके घोंसलों और नवजात चूजों को प्राकृतिक सुरक्षा देती है। लेकिन मौके पर कई हिस्सों से घास काटे जाने के कारण मोरों के लिए चिंता बढ़ गई है।
वहीं, मोर के घोंसलों और चूहों की सुरक्षा के लिए वन विभाग ने पांच कर्मचारियों की तैनाती की है, लेकिन मौके के निरीक्षण के दौरान दो वनरक्षक दोपहर करीब 1:30 बजे सोते हुए मिले। घास हटने और निगरानी में लापरवाही से घोंसले, अंडे और चूजे आवारा कुत्तों समेत अन्य शिकारियों के लिए ज्यादा असुरक्षित हो सकते हैं।
मामले में डीएफओ शैलेश माचरा से प्रतिक्रिया लेने के लिए कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। अब सवाल है कि प्रजनन काल के इस संवेदनशील दौर में मोर वन में सुरक्षा व्यवस्था कितनी प्रभावी है और राष्ट्रीय पक्षी के संरक्षण के लिए जमीन पर कितनी गंभीरता से निगरानी की जा रही है।
