
सोल, 13 अगस्त (वार्ता) दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्युंग ने सेना को घटाने का आह्वान किया है।
श्री जे-म्युंग ने गुरुवार को चुनिंदा सैन्य भर्ती और तकनीक पर आधारित एक छोटी सेना की ओर बढ़ने का प्रस्ताव पेश किया है। उन्होंने कहा कि देश में लगातार कम होती जन्म दर के कारण बड़ी संख्या में सैनिकों वाली रक्षा व्यवस्था को बनाए रखना मुश्किल हो गया है। योनहाप समाचार एजेंसी के अनुसार, राष्ट्रपति भवन में वरिष्ठ सहयोगियों के साथ एक बैठक में श्री जे-म्युंग ने कहा, “हमें चुनिंदा सैन्य भर्ती शुरू करनी चाहिए और रक्षा सुधारों को तेज़ी से और पूरी तरह से लागू करना चाहिए, ताकि हमारी सेना आधुनिक उपकरणों और तकनीक पर आधारित एक स्मार्ट, बेहतरीन और मज़बूत सेना बन सके।”
उन्होंने कहा कि दक्षिण कोरिया में घटती जन्म दर के कारण ऐसी ‘अकुशल सैन्य संरचना’ को बनाए रखना असंभव और अनुचित है, जो मुख्य रूप से सैनिकों और पैदल सेना पर निर्भर करती है। उन्होंने कहा, “इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बात यह है कि हम सिस्टम को इस तरह से फिर से डिज़ाइन करें कि युवा, जो राष्ट्रीय रक्षा की रीढ़ हैं, अपने भविष्य के लिए एक बेहतर जीवन की योजना बना सकें।”
गौरतलब है कि दक्षिण कोरिया में शारीरिक रूप से स्वस्थ पुरुषों के लिए कम से कम 18 महीने की सैन्य सेवा पूरी करना ज़रूरी है। हालांकि कुछ लोगों को इससे छूट मिलती है या उन्हें दूसरे तरह की सेवा में लगाया जाता है। उन्होंने ऐसी नीतियां बनाने की भी अपील की, जिनसे सैन्य सेवा के ज़रिए रोज़गार और शिक्षा के रास्ते खुलें और साथ ही युवा अपनी सेवा के दौरान या उसके बाद आर्थिक संपत्ति बना सकें।
श्री जे-म्युंग ने कहा, “सरकार की यह बड़ी ज़िम्मेदारी है कि वह यह सुनिश्चित करे कि लोग सेना में बिताए अपने समय को ज़िंदगी की बर्बादी या नुकसान न समझें।” ये बातें ऐसे समय में कही गई हैं जब दक्षिण कोरिया की सेनाएं कृत्रिम बुद्धिमता, रोबोटिक्स और स्वशासी प्रणाली लाकर श्रमशक्ति पर निर्भरता कम करने की कोशिशें तेज़ कर रही हैं। सेना रखरखाव और लॉजिस्टिक्स के कामों को स्वचालित करने की कोशिश कर रही है, जबकि नौसेना ने पिछले महीने एक ऐसे ह्यूमनॉइड रोबोट का परीक्षण किया जो जहाज़ के संचालनकर्ता का काम कर सकता है। श्री जे-म्युंग की ओर से चुनिंदा लोगों की अनिवार्य भर्ती की अपील ऐसे समय में की गयी है जब दक्षिण कोरिया दुनिया में सबसे कम जन्म दर की समस्या का सामना कर रहा है, जिससे मौजूदा अनिवार्य भर्ती-आधारित रक्षा प्रणाली के तहत सैनिकों की संख्या बनाए रखने की देश की क्षमता पर चिंता बढ़ गयी है।
