मॉस्को, 12 अगस्त (वार्ता) रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने बुधवार को चेतावनी दी कि यदि पश्चिमी देशों ने रूसी वाणिज्यिक जहाजों को जब्त करने की कोशिश की तो रूस को जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार है और यह कार्रवाई उन जल क्षेत्रों तक सीमित नहीं होगी जहां रूसी जहाजों को रोका गया है।
श्री पुतिन ने कहा, “यदि इन योजनाओं को अमल में लाया जाता है तो हमें उसी तरह जवाब देना होगा।” उन्होंने कहा कि रूस की प्रतिक्रिया जरूरी नहीं कि उन क्षेत्रों तक सीमित हो जहां रूसी जहाजों को जब्त किया गया है, बल्कि यह “जहां भी हमें आवश्यक और उचित लगे” वहां की जा सकती है। इसमें रूस के प्रशांत बेड़े के जिम्मेदारी वाले क्षेत्र भी शामिल हो सकते हैं।
श्री पुतिन ने यह भी कहा कि रूस अपने पड़ोसी और मित्र देशों के साथ पारस्परिक हितों के सम्मान के आधार पर आपसी रूप से स्वीकार्य समझौते की तलाश जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
रूसी समाचार एजेंसी तास के अनुसार, रूसी नाविकों से बातचीत के दौरान श्री पुतिन ने कहा कि उन्होंने रक्षा मंत्रालय को इस मुद्दे पर काम करने का निर्देश पहले ही दे दिया है और प्रशांत बेड़े के कमान को भी इसकी जानकारी दी गयी है। उन्होंने कहा कि उन्हें रूस की संभावित प्रतिक्रिया को लेकर प्रस्ताव की उम्मीद है।
श्री पुतिन ने कुछ पश्चिमी देशों पर अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि रूसी आर्थिक हितों से जुड़े नागरिक जहाजों की आवाजाही प्रतिबंधित की जा रही है और रूसी जहाजों को जब्त कर उन्हें बेचने की योजनाओं पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने ऐसी कार्रवाइयों को “समुद्री डकैती और लूट” के समान बताया।
इस बीच, रूस की सुरक्षा परिषद के उपाध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने कहा कि यदि पर्याप्त आधार हो कि किसी वाणिज्यिक जहाज में दुश्मन देशों के लिए चिह्नित माल ले जाया जा रहा है तो रूस को रूसी या तटस्थ जल क्षेत्रों में ऐसे जहाजों पर हमला करने का अधिकार है।
श्री मेदवेदेव ने टेलीग्राम पर एक पोस्ट में कहा कि पश्चिमी यूरोप के अधिकांश वाणिज्यिक जहाज भी सुविधाजनक झंडे के तहत चलते हैं। उन्होंने तर्क दिया कि रूस ऐसे जहाजों के खिलाफ “निष्पक्ष और सममित” रुख अपना सकता है।
उनकी यह टिप्पणी रूस के तथाकथित “शैडो फ्लीट” को लेकर पश्चिमी देशों की आलोचना के जवाब में आयी। शैडो फ्लीट में ऐसे वाणिज्यिक जहाजों को शामिल किया जाता है जो विदेशी झंडे के तहत संचालित होते हैं और जिनके बारे में आरोप है कि वे रूसी सामान पहुंचाते हैं या अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से बचने में रूस की मदद करते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे जहाज अक्सर सहूलियत के तहत ध्वज चुनते हैं। इस व्यवस्था में जहाजों को उनके वास्तविक मालिकों के देश के बजाय किसी अन्य देश में पंजीकृत किया जाता है, जिससे कर और नियामकीय लागत कम हो सकती है।
श्री मेदवेदेव ने ऐसे पंजीकरण के लिए आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले देशों में पनामा, लाइबेरिया, मार्शल द्वीप, बहामास, बेलीज, बरमूडा, केमैन द्वीप, साइप्रस, माल्टा और सेशेल्स का उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन या संबंधित देशों के घरेलू कानूनों के तहत यूरोपीय सरकारों के पास ऐसे जहाजों को रोकने का कोई कानूनी आधार नहीं है और ऐसी कार्रवाई को “खुली मनमानी” बताया।
श्री मेदवेदेव ने यह भी चेतावनी दी कि रूसी सशस्त्र बल अपनी कार्रवाई का दायरा काला सागर से आगे बढ़ा सकते हैं। उन्होंने इस संबंध में प्रशांत बेड़े के कमांडर विक्टर लिइना की ओर से राष्ट्रपति पुतिन को दी गयी रिपोर्ट का हवाला दिया।
श्री पुतिन ने यह मुद्दा दक्षिण सखालिन्स्क में प्रशांत बेड़े के प्रमुख युद्धपोत ‘वैराग’ पर सवार रहते हुए उठाया। उन्होंने कहा कि रूस ने अपने सैन्य नेतृत्व को रूसी हितों से जुड़े जहाजों की संभावित पश्चिमी जब्ती के लिए तैयारी करने के निर्देश दिए हैं और दोहराया कि मॉस्को की जवाबी कार्रवाई उन स्थानों से काफी दूर भी हो सकती है जहां जहाजों को रोका गया हो।
