मुंबई | टेलीकॉम सेक्टर की दिग्गज कंपनी वोडाफोन-आइडिया (Vi) ने अपने बोर्ड स्तर पर बड़े फेरबदल की घोषणा की है। दिग्गज कारोबारी और आदित्य बिड़ला समूह के प्रमुख कुमार मंगलम बिड़ला को कंपनी का नया नॉन-एग्जीक्यूटिव चेयरमैन नियुक्त किया गया है। बिड़ला इस पद पर रविंदर टक्कर की जगह लेंगे, जो अब वाइस-चेयरमैन के रूप में बोर्ड का हिस्सा बने रहेंगे। इस घोषणा के साथ ही शेयर बाजार में सकारात्मक प्रतिक्रिया देखने को मिली और एनएसई (NSE) पर कंपनी के शेयर 4 प्रतिशत तक की बढ़त के साथ 11.24 रुपये के स्तर पर पहुंच गए।
भले ही नेतृत्व परिवर्तन से बाजार का सेंटिमेंट सुधरा है, लेकिन कंपनी के सामने वित्तीय चुनौतियां अब भी बरकरार हैं। वोडाफोन-आइडिया भारी कर्ज और एजीआर (AGR) बकाया के बोझ तले दबी हुई है। कंपनी को वित्त वर्ष 2032 से एजीआर की बड़ी किस्तों का भुगतान करना है, साथ ही अगले तीन वर्षों में लगभग 49,000 करोड़ रुपये का स्पेक्ट्रम बकाया भी चुकाना है। दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, कंपनी ने 17,418 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा दर्ज किया है, जो इसकी वित्तीय स्थिरता के लिए एक बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है।
प्रतिस्पर्धी बाजार में बने रहने के लिए कंपनी अब चुनिंदा टैरिफ एडजस्टमेंट पर ध्यान केंद्रित कर रही है। भारती एयरटेल जैसे प्रतिद्वंद्वियों द्वारा दरों में बढ़ोतरी के बाद, एनालिस्ट्स को उम्मीद है कि वोडाफोन-आइडिया भी रेवेन्यू ग्रोथ के लिए टैरिफ में सुधार करेगी। हालांकि बोर्ड स्तर पर बिड़ला की वापसी से अल्पकालिक राहत मिली है, लेकिन लंबी अवधि में कंपनी का भविष्य फंड जुटाने की क्षमता, सरकारी पॉलिसी सपोर्ट और वित्तीय पुनर्गठन योजनाओं के सफल कार्यान्वयन पर निर्भर करेगा। फिलहाल, बिड़ला की लीडरशिप से निवेशकों को कंपनी की वापसी की नई उम्मीद जगी है।

