जबलपुर: कभी महिला अधिकारी द्वारा लगाए गए कुलगुरू पर आरोप, तो कभी बीएससी के एक पेपर में पूछा गया प्रश्न की रानीदुर्गावती का मकबरा कहां है?, तो कभी पेपर के टाइम टेबिल में चार साल का गैफ और अब रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के प्रशासनिक भवन में आवारा कुत्तों के डेरे की खबर से एक बार फिर से विवि प्रबंधन सुर्खियों में आ गया है। वजह विवि के लापरवाह अधिकारी-कर्मचारियों के कार्य के ढर्रे की.. जी हां हम बात कर रहे हैं आरडीवीवी के प्रशासनिक भवन स्थित कुलसचिव कक्ष की निगरानी कर रहे आवारा कुत्तों की… क्योंकि इन दिनों कुछ ऐसे ही नजारे विवि परिसर में देखे जा रहे हैं।
इतना ही नहीं आरडीवीवी के प्रवेश द्वार, परीक्षा व गोपनीय विभाग में भी आवारा कुत्तों का डेरा जमा हुआ है। आलम ये है कि अपनी-अपनी शिकायतें लेकर विवि प्रबंधन के पास पहुंचे छात्र-छात्राएं डरे सहमें से वहां से गुजरते हुए निकल रहे हैं। उन्हें डर हमेशा सताता रहता है कि कहीं ये आवारा कुत्ते उन्हें काटकर अपना शिकार न बना लें। यह पूरी अव्यवस्था रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के अधिकारी-कर्मचारियों की कार्यशैली की पोल भी खोल रही है।
सुरक्षा कर्मियों पर कार्रवाई करने का है नियम
आपको बता दें कि विश्वविद्यालय में तैनात सभी सुरक्षा कर्मियों की ड्यूटी है कि परिसर में सुरक्षा व्यवस्था दुरूस्त रहे। अगर सुरक्षा में कोई भी चूक या लापरवाही होती है तो संबंधित सुरक्षा कर्मियों पर विश्वविद्यालय प्रबंधन द्वारा कार्रवाई करना भी सुनिश्चित है। लेकिन आज तक ऐसी किसी भी सुरक्षा कर्मी या जिम्मेदार अधिकारी पर विवि प्रबंधन द्वारा कार्रवाई की गई है। जो कि पूरे विवि प्रबंधन की कार्यशैली को कटघरे में इन दिनों खड़ा कर रहा है।
विभागाध्यक्षों ने कहा.. ऐसे में क्या कहें
विभागाध्यक्षों ने नवभारत से कहा कि जब विश्वविद्यालय के कुलसचिव के कमरे में बाहर ऐसे हालात हैं और उसे ठीक नहीं किया जा रहा है तो फिर विश्वविद्यालय के दूसरे अन्य परिसर में मौजूद आवारा कुत्तों को कैसे बाहर किया जा सकता है। नाम न छापने की शर्त पर आरडीवीवी पहुंचे कुछ छात्राओं ने नवभारत से कहा कि आरडीवीवी के प्रशासनिक भवन में आवारा खतरनाक कुत्तों को बाहर करने की अपेक्षा विवि के कर्मचारी गैलरी में ही उन्हें रोटियां देते हैं, कभी बिस्किट देते हैं, इसलिए खाने की लालच में इन आवारा कुत्तों की फौज विवि परिसर में एकत्रित हो जाती है
