रसूख और रंजिश के फेर में फंसा गाँव का गरीब पीड़ित परिवार 

बालाघाट,  मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के थाना लामटा अंतर्गत आने वाले ग्राम मौरिया में भूमि एवं रास्ते के विवाद को लेकर प्रशासनिक हलचल अचानक चरम पर पहुँच गई है। शासकीय अमले और भारी पुलिस बल की अचानक हुई इस बड़ी कार्रवाई के बाद यह पूरा मामला अब महज़ एक आम जमीनी विवाद न रहकर सीधे-सीधे राजनीतिक रसूख, रिश्तेदारों के प्रभाव और प्रशासनिक दबाव के बेहद संगीन और गंभीर आरोपों में घिर चुका है। पीड़ित उराड़े परिवार का स्पष्ट और सीधा आरोप है कि बालाघाट सांसद भारती पारधी के बेहद करीबी रिश्तेदारों और चहेते परिवार को अनुचित लाभ पहुँचाने की नीयत से पूरा प्रशासनिक अमला नियम-कायदों को ताक पर रखकर एकतरफा कार्रवाई को अंजाम दे रहा है।

 

 

​सत्ता का संरक्षण, रिश्तेदारी का दबाव और पिसता पीड़ित परिवार

​पीड़ित ग्रामीण साहरू लाल उराड़े ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी पुश्तैनी आवासीय संपत्ति और मीरा बाई के नाम पर राजस्व रिकॉर्ड में बाकायदा दर्ज 4 डिसमिल लगान की निजी भूमि पर जबरन बुलडोजरनुमा प्रशासनिक कार्रवाई की जा रही है। साहरू लाल के अनुसार

​यह रास्ता केवल हमारे मकान तक आने-जाने का निजी मार्ग रहा है, यहाँ से कभी कोई सार्वजनिक आवागमन या किसी की गाड़ी-बैल नहीं निकली। हमने लामटा तहसील से लेकर जिला स्तर की जनसुनवाई में चार-पाँच बार लिखित आवेदन दिए, लेकिन हमारी एक न सुनी गई और प्रशासन ने अचानक आकर हमारे घर के सामने बना ढांचा और कोठा तोड़ डाला।

 

सत्ता का दुरुपयोग हुआ

​वहीं मोहन लाल उराड़े ने इस पूरी कार्रवाई के तार सीधे तौर पर सांसद भारती पारधी और उनके परिजनों से जुड़े होने का खुलासा किया। मोहन लाल का कहना है

​विपक्ष में मौजूद मुकेश पारधी और अन्य लोग सांसद भारती पारधी के करीबी रिश्तेदार हैं। ये लोग अपनी पहुँच का फायदा उठाकर बार-बार सांसद महोदया से प्रशासनिक अधिकारियों पर दबाव बनवाते हैं। हल्का पटवारी शर्मा जी ने खुद हमसे निजी तौर पर स्वीकार किया था कि सांसद महोदया का बार-बार फोन आता है, वे हमें परेशान करती हैं, इसलिए हमें मजबूरन यहाँ आना पड़ता है। पिछले 5 महीनों में 5 बार इस ज़मीन की नाप (पैमाइश) हो चुकी है, लेकिन निष्पक्ष न्यायसंगत फैसला देने के बजाय सीधे सत्ता और रसूख के दबाव में हमारे निजी हक पर डंडा चलाया जा रहा है।

*ग्राम मोरिया के ग्रामीणों ने बताया 50 सालों में कभी नहीं था सार्वजनिक रास्ता*

​गाँव के ही वरिष्ठ नागरिक ओमकार पाटील ने मामले की वास्तविक स्थिति उजागर करते हुए बताया कि पीछे की जगह उराड़े परिवार के पूर्वजों द्वारा खुद कमाई और संवारी गई संपत्ति है। ओमकार पाटील के अनुसार

​वहाँ केवल व्यक्तिगत आवागमन ही था और वर्षों पुरानी एक सकड़ी छेंडी मात्र थी। हमने अपनी 50-52 वर्षों की उम्र में कभी छेंडी से गाँव के किसी व्यक्ति की गाड़ी, ट्रैक्टर या बैलगाड़ी को गुजरते नहीं देखा। अब उसे अचानक चौड़ा सरकारी रास्ता बताना पूरी तरह गलत है।

 

​नक्शे के आधार पर मिला हमारा हक

​दूसरे पक्ष के अनुसार मामले के आवेदक प्रकाश पारधी ने प्रशासनिक कार्रवाई का पुरजोर समर्थन करते हुए इसे न्यायसंगत करार दिया। प्रकाश पारधी का कहना है

​यह 5 मीटर चौड़ा रास्ता है जिस पर इन लोगों ने अवैध कब्जा कर रखा था। इस रास्ते के अवरुद्ध होने के कारण मेरे 8 एकड़ खेत का आवागमन पूरी तरह ठप था, जिससे रबी और खरीफ दोनों सीजन में मुझे लगभग 2 से 3 लाख रुपये का भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा था। हमने जनसुनवाई, कलेक्टर और एसडीएम साहब को आवेदन दिया था, जिसके बाद ही वैधानिक रूप से नक्शे के अनुसार रास्ता बहाल किया गया है।

 

*​प्रशासनिक अधिकारी का कहना नियमानुसार ही हुई है कार्रवाई*

​कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारी ने राजनीतिक दबाव और पक्षपात के तमाम आरोपों को पूरी तरह से खारिज किया। अधिकारी का कहना है

​यहाँ असल में दो अलग-अलग मामले हैं – एक आम सार्वजनिक रास्ते का और दूसरा 4 डिसमिल निजी भूमि का। दोनों को आपस में मिलाकर भ्रम फैलाया जा रहा है। पिछले वर्ष तहसीलदार लामटा न्यायालय द्वारा पारित आधिकारिक आदेश के परिपालन में ही केवल रास्ते से अतिक्रमण हटाया गया है। बारिश के मौसम में किसी भी आवासीय मुख्य ढांचे को नुकसान पहुँचाए बिना यह कार्रवाई विशुद्ध रूप से राजस्व रिकॉर्ड और अदालती आदेशों के तहत की गई है।

 

*​मौरिया में तनाव व्याप्त, उराड़े परिवार जाएगा अदालत*

​इस बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई और सांसद के रिश्तेदारों के हस्तक्षेप के खुलासे के बाद ग्राम मौरिया में स्थिति बेहद तनावपूर्ण बनी हुई है। ग्रामीणों के बीच अब यह चर्चा आम है कि जब रसूखदारों और जनप्रतिनिधियों के करीबियों का प्रभाव प्रशासनिक तंत्र की निष्पक्षता पर हावी होने लगे, तो आम नागरिक न्याय के लिए कहाँ जाए। खुद को पीड़ित बता रहा उराड़े परिवार अब उच्च प्रशासनिक अधिकारियों सहित उच्च न्यायालय की शरण में जाने की तैयारी कर रहा है।

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