बारिश के मौसम की खास सब्जी किकोड़ें, बाजार में बढ़ी मांग

डही . विकासखंड डही के ग्रामीण इलाकों में किकोडे की शुरुआत शुरू हो गई है जब की गत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष कम मात्रा में उपज पैदा हुई है इस क्षेत्र से कीकोडे गुजरात महाराष्ट्र मध्य प्रदेश भोपाल इंदौर कई राज्य तक यहां से पिकअप गाडिय़ां भर भर कर जाती है इस वर्ष बारिश की कमी के कारण उपजी बहुत ही काम और एक माह लेट यह फसल आई वर्तमान में इसका भाव 150 से 120 में प्रति किलो बिक रहा है जबकि यही किकोडे गुजरात महाराष्ट्र में ढाई सौ से ?300 किलो बिक रहा है जबकि क्षेत्र में इस सब्जी को कटले के नाम से पहचाना जाता है

बरसात का मौसम शुरू होते ही ग्रामीण क्षेत्रों और स्थानीय बाजारों में कई तरह की पारंपरिक हरी सब्जियां नजर आने लगती हैं। इन्हीं में शामिल है किकोड़ें, जिसे कई क्षेत्रों में ककोरा, कंटोला या स्पाइन गॉर्ड के नाम से भी जाना जाता है। तस्वीर में दिखाई दे रहे छोटे-छोटे हरे किकोड़ें इन दिनों बाजार में आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। कांटेदार और गोल आकार का यह फल देखने में भले ही अलग दिखाई देता हो, लेकिन क्षेत्र के ग्रामीण और आदिवासी अंचलों में इसे पारंपरिक रूप से सब्जी के रूप में खूब पसंद किया जाता है। खासकर बारिश के मौसम में जंगल और खेत-खलिहानों के आसपास मिलने वाले किकोड़ें ग्रामीण बाजारों तक पहुंचते हैं। स्वाद में खास, सब्जी में लोकप्रिय किकोड़ें की सब्जी को मसालों के साथ बनाया जाता है। इसकी कुरकुरी बनावट और विशिष्ट स्वाद इसे दूसरी हरी सब्जियों से अलग बनाता है। कई लोग इसे आलू के साथ या मसालेदार तरीके से बनाना पसंद करते हैं जबकि यह सब्जी अत्यधिक पौष्टिक होती है। ग्रामीण क्षेत्रों में यह बरसात के दिनों की पारंपरिक सब्जियों में गिनी जाती है।

 

प्राकृतिक रूप से मिलने वाली मौसमी सब्जी किकोड़ें की खासियत यह भी है कि यह एक मौसमी उपज है। इसके बाजार में आने के साथ ही ग्रामीण अंचलों में स्थानीय स्तर पर रोजगार और छोटे व्यापार को भी बढ़ावा मिलता है,इस वर्ष आवक काफी कम हो रही हैं ! कई ग्रामीण इसे एकत्र कर स्थानीय हाट-बाजारों में बेचते हैं। तस्वीर बयां कर रही बाजार की रौनक तस्वीरों में बड़ी मात्रा में हरे किकोड़ें दिखाई दे रहे हैं। कहीं हाथ में रखे ताजे किकोड़ें नजर आ रहे हैं तो कहीं बड़ी टोकरी और ठेलों पर इनका ढेर लगा हुआ है। बारिश के मौसम में बाजार में आई यह हरी सौगात लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। किकोड़ें सिर्फ एक मौसमी सब्जी नहीं, बल्कि ग्रामीण अंचल का पारंपरिक खान-पान है!

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