
रीवा, साइबर अपराध का लगातार लोग शिकार हो रहे है, अब अधिकारियों के नाम का उपयोग कर साइबर ठग कर्मचारियों को अपना शिकार बनाने लगे है. रीवा में साइबर ठग ने ऐसा पैतरा खेला की बीएमओ ने विभाग की सारी जानकारी उसे दे दी. इसके बाद जो हुआ उससे विभाग में हडकम्प मच गया. दो एएनएम के खाते से पैसे निकल गये. जिसकी शिकायत कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक से की गई है. ठग ने खुद को नायब तहसीलदार बताकर ठगी की वारदात को अंजाम दिया.
साइबर ठग ने अपने आप को नायब तहसीलदार अशोक मीणा बताते हुए पहले बीएमओ डा. आनंद पाण्डेय से सारी जानकारी ली और इसके बाद एक-एक कर एएनएम को ठगी का शिकार बनाने लगा, ठग ने डॉक्टर साहब को यह भी मैसेज दिया की कलेक्ट्रेट से फोन आएगा तो एएनएम को उठाने के लिए निर्देशित कर दीजिए और साहब ने निर्देशित कर दिया. पीडि़तों ने बताया कि विभाग की सारी जानकारी साइबर ठग के पास थी. उसने विकास कार्यों के नाम पर तो किसी से कार्यों के नाम पर चर्चा की और विकास कार्य के लिए पैसा डालने के लिए कहा. पहले एएनएम के खाते में 10 रूपए डालें और फिर वापस10 अपने खाते में मांगा इसके बाद पैसा काटने का सिलसिला शुरू हो गया. बीड़ा में पदस्थ एएनएम पीडि़ता रीता पनिका ने बताया कि उसके साथ दो बार में 28000 रुपए की ठगी हुई. वहीं रगौली में पदस्त विश्व मोहिनी नामदेव के साथ 53000 की ठगी की गई है. विभाग के अधिकारियों के संबंध में सारी जानकारी मिलने के बाद साइबर ठग ने दो लोगों के साथ ठगी की और कई लोगों को फोन लगाकर उनसे कार्यों के संबंध में बात करता रहा.
बीएमओ को फोन कर लिया झासे में
बीएमओ डा. आनंद पाण्डेय ने बताया कि उन्हे भी फोन कर झासे में लिया गया था. उनके मुताबिक फोन करने वाले ने कहा था कि सभी एएनएम को ग्रुप में सूचना दे दें कि उसका फोन आएगा और मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराए. बीएमओ ने फोन करने वाले की बात पर भरोसा करते हुए ग्रुप में इसका सूचना दे दी और इसके बाद एएनएम विश्व मोहनी नामदेव को फोन आया. बातचीत के दौरान उनके खाते से लगभग 53 हजार रूपये निकल गये. एएनएम का कहना है कि बीएमओ द्वारा पहले ही संबंधित अधिकारी का फोन आने की जानकारी दे दी थी, जिसके चलते उन्हे संदेह नही हुआ.
