बुधनी: ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के दावों के बीच तहसील के कई गांवों में प्राथमिक स्कूल भवनों की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. यारनगर, जलाखेड़ा, ऊंचाखेड़ा व कई गांवों में स्कूल भवन जर्जर हालत में हैं. बारिश में कहीं छत से पानी टपकता है तो कहीं दीवारों का प्लास्टर उखडऩे से हादसे का खतरा बना रहता है.ग्रामीण क्षेत्रों के कई प्राथमिक स्कूलों में पर्याप्त कक्ष उपलब्ध नहीं होने से कक्षा 1 से 5 तक की पढ़ाई महज दो कमरों में कराई जा रही है. एक ही कमरे में अलग-अलग कक्षाओं के बच्चों को बैठाने की मजबूरी है. इससे बच्चों को बैठने में परेशानी के साथ पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है.
यारनगर के प्राथमिक स्कूल का भवन काफी पुराना बताया जा रहा है. यहां दो शिक्षक पदस्थ हैं. ग्रामीणों के अनुसार गांव में करीब 70 परिवार और लगभग 600 लोग निवास करते हैं. गांव में आंगनवाड़ी का अलग भवन नहीं होने के कारण छोटे बच्चों को स्कूल के बरामदे में बैठाकर पढ़ाना पड़ रहा है. बारिश के दौरान बच्चों को काफी परेशानी होती है. ग्रामीणों ने आंगनवाड़ी के लिए अलग भवन की मांग की है. यारनगर के अलावा जलाखेड़ा, ऊंचाखेड़ा समेत अन्य गांवों के प्राथमिक स्कूलों में भी भवन और मूलभूत सुविधाओं की कमी बताई जा रही है. कहीं पर्याप्त कमरे नहीं हैं तो कहीं पेयजल, बिजली और शौचालय की समस्या है. ग्रामीणों का कहना है कि बच्चों को इन परिस्थितियों में पढ़ाना उनकी मजबूरी बन गया है. बीआरसी मणिशंकर शर्मा ने बताया कि ब्लॉक में करीब 39 ऐसे स्कूल भवन चिन्हित किए गए हैं, जिनमें कार्य कराया जाना है. इसके लिए वार्षिक कार्य योजना के अंतर्गत विभाग को पत्र लिखा गया है. स्वीकृति प्राप्त होते ही संबंधित स्कूल भवनों में आवश्यक कार्य कराया जाएगा.
