दुर्ग, 09 अगस्त (वार्ता) छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में साइबर ठगी की रकम को अलग-अलग बैंक खातों के जरिए ट्रांसफर करने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 13 म्यूल बैंक खाताधारकों को गिरफ्तार किया है। सुपेला और भिलाई नगर थाना पुलिस की कार्रवाई में पकड़े गए आरोपियों के बैंक खातों में 10 लाख रुपए से अधिक के संदिग्ध लेन-देन सामने आए हैं।
पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी से जुड़े मामलों की जांच के दौरान कुछ बैंक खातों में लगातार संदिग्ध वित्तीय लेन-देन की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद थाना सुपेला, भिलाई नगर और एसीसीयू की टीम ने संबंधित खातों और उनसे जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल शुरू की। मोबाइल नंबर, बैंक ट्रांजेक्शन और अन्य दस्तावेजों के आधार पर 13 खाताधारकों की पहचान की गई।
जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपियों ने कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते दूसरे लोगों को इस्तेमाल करने के लिए उपलब्ध कराए थे। इसके साथ ही उन्होंने पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक और सिम कार्ड भी उपलब्ध कराए। पुलिस के मुताबिक, इसके एवज में आरोपियों को 2 हजार रुपए से 15 हजार रुपए तक कमीशन मिलता था।
पुलिस ने बताया कि साइबर ठगी से हासिल रकम पहले इन बैंक खातों में जमा कराई जाती थी और इसके बाद उसे दूसरे खातों में ट्रांसफर किया जाता था। इस तरह रकम को कई खातों के बीच घुमाकर उसके वास्तविक स्रोत को छिपाने का प्रयास किया जाता था। पुलिस अब उन लोगों और एजेंटों की जानकारी जुटा रही है, जिन्होंने इन बैंक खातों को साइबर अपराध में इस्तेमाल करने के लिए हासिल किया था।
सुपेला थाना पुलिस ने 10 आरोपियों अनिरुद्ध बेसरा, डिकेश साहू उर्फ गोल्डी, संदीप खन्ना, दिलबाग सिंह, शिव कुमार, सुमीत कुमार, रेहान कुरैशी, ललीत कुमार, भोज कुमार देवांगन और धनेश्वर यादव को गिरफ्तार किया है। वहीं भिलाई नगर थाना पुलिस ने अमित कुमार, गोपी सोनी और प्रीति उपाध्याय को पकड़ा है।
पुलिस जांच में सामने आया कि सुपेला क्षेत्र में बंधन बैंक से जुड़े 10 बैंक खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम के लेन-देन के लिए किया गया। इसी तरह भिलाई नगर क्षेत्र में पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े 3 खातों में संदिग्ध ट्रांजेक्शन मिले। इन सभी खातों में 10 लाख रुपए से ज्यादा की संदिग्ध रकम का लेन-देन पाया गया है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक, सिम कार्ड, मोबाइल फोन और अन्य जरूरी दस्तावेज जब्त किए हैं। पुलिस इन बैंक खातों से हुए लेन-देन की विस्तृत जांच कर रही है और साइबर ठगी की रकम के अंतिम लाभार्थियों तथा खातों की व्यवस्था कराने वाले एजेंटों तक पहुंचने का प्रयास किया जा रहा है।
