
भोपाल। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को भोपाल के दशहरा मैदान में मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषद के तत्वावधान में विशाल आदिवासी सम्मेलन आयोजित किया गया। सम्मेलन में 22 से अधिक आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों सहित बड़ी संख्या में समाज के लोगों ने हिस्सा लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत माता मंदिर चौराहे से निकली विशाल रैली से हुई। पारंपरिक वेशभूषा में शामिल आदिवासी समाज के लोग ढोल-मांदल की थाप पर मार्च करते हुए दशहरा मैदान पहुंचे। इस दौरान पारंपरिक नृत्य, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और रंग-बिरंगी वेशभूषा ने आदिवासी संस्कृति और पहचान को प्रदर्शित किया।
सम्मेलन में मध्यप्रदेश आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि वे सम्मेलन में नेता प्रतिपक्ष के रूप में नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के सदस्य के तौर पर पहुंचे हैं। उन्होंने दावा किया कि मध्यप्रदेश की आबादी में आदिवासियों की हिस्सेदारी 22 प्रतिशत से अधिक है, इसके बावजूद उनके अधिकारों की अनदेखी की जा रही है और उनकी पहचान तथा अस्तित्व को कमजोर करने के प्रयास हो रहे हैं।
सिंघार ने कहा, “आदिवासी भीख नहीं मांगते, वे केवल अपने अधिकार मांगते हैं।” उन्होंने संस्कृति, परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा पर जोर दिया।
उन्होंने अलग आदिवासी कोड की मांग दोहराते हुए कहा कि ब्रिटिश शासन के दौरान आदिवासियों का अलग कोड था, इसलिए आज भी उन्हें अलग आदिवासी कोड मिलना चाहिए। उन्होंने कहा, “आदिवासी कोड के लिए हम एक बार नहीं, 100 बार लड़ेंगे।”
उन्होंने आदिवासी युवाओं में अधिकारों, पहचान और भविष्य को लेकर बढ़ती जागरूकता का उल्लेख करते हुए समाज की एकजुटता को जरूरी बताया।
