डॉ. जितेंद्र सिंह ने लखनऊ में देश का पहला ‘इको-एजुकेशनल हब’ राष्ट्र को समर्पित किया

नयी दिल्ली, 08 अगस्त (वार्ता) केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने शनिवार को लखनऊ के बंथरा स्थित महर्षि पाराशर बायोरिसोर्स सेंटर (एमपीबीसी) में सीएसआईआर-राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनबीआरआई) द्वारा विकसित अपनी तरह के पहले ‘इको-एजुकेशनल हब’ ‘प्रकृति ज्ञान धाम’ को राष्ट्र को समर्पित किया।

डॉ. सिंह ने इस अवसर पर वैज्ञानिक संस्थानों से अपनी प्रौद्योगिकियों, सफल प्रयोगों और शोध के सामाजिक उपयोग को व्यापक स्तर पर लोगों तक पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थानों को अपने अनुसंधान को आजीविका और समाज की वास्तविक जरूरतों से जोड़ना चाहिए। वैज्ञानिक उपलब्धियों की पहुंच केवल प्रयोगशालाओं और संस्थानों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि किसानों, विद्यार्थियों, उद्यमियों, उद्योगों और अन्य हितधारकों तक होनी चाहिए। उन्होंने इसके लिए डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के प्रभावी इस्तेमाल पर भी जोर दिया।

केंद्रीय मंत्री ने विभिन्न विभागों और मंत्रालयों के बीच समान एवं पूरक परियोजनाओं के एकीकरण की आवश्यकता बतायी। उन्होंने कहा कि एकीकृत वैज्ञानिक प्रयासों से उपलब्ध संसाधनों और विशेषज्ञता का बेहतर उपयोग किया जा सकता है तथा अनुसंधान एवं नवाचार का सामाजिक प्रभाव अधिकतम किया जा सकता है।

‘प्रकृति ज्ञान धाम’ को वैज्ञानिक अनुसंधान, पर्यावरण शिक्षा, जैव विविधता संरक्षण, वनस्पति विरासत और सांस्कृतिक व्याख्या को एक साथ जोड़ने वाली सुविधा के रूप में विकसित किया गया है। इसे विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं, शिक्षकों, प्रकृति प्रेमियों और आम जनता के लिए अनुभवात्मक शिक्षण केंद्र के तौर पर तैयार किया गया है।

केंद्रीय मंत्री ने पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण और जलवायु संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक अनुसंधान के साथ स्थानीय और पारंपरिक ज्ञान का समन्वय जरूरी है। उन्होंने सीएसआईआर-एनबीआरआई द्वारा पौध विज्ञान अनुसंधान को किसानों, उद्योगों और आम लोगों के लिए उपयोगी तकनीकों और उत्पादों में बदलने के प्रयासों की सराहना की।

 

Next Post

नीमच के आदित्य जैन को प्रतिष्ठित राष्ट्र स्तरीय रामायणी सम्मान

Sat Aug 8 , 2026
नीमच। ज्ञानोदय विश्वविद्यालय, नीमच के पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान विभाग में सेवारत सहायक प्राध्यापक आदित्य जैन को प्रतिष्ठित ‘राष्ट्रीय रामायणी सम्मान 2026’ के लिए चयनित किया गया है। उन्हें यह सम्मान 19 अगस्त को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में आयोजित भव्य समारोह में, रामायण रिसर्च काउंसिल द्वारा गोस्वामी तुलसीदास जयंती के […]

You May Like