अमेरिकी सीनेट ने पास किया नया बिल: रूस से तेल आयात करने पर भारत और चीन पर लग सकता है 100% टैरिफ

वॉशिंगटन। अमेरिकी सीनेट ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने से जुड़े एक विधेयक को 86-11 के बहुमत से पारित कर दिया है। इस विधेयक के दायरे में भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान को शामिल किया गया है। यह प्रस्ताव रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों दलों के समर्थन से लाया गया। विधेयक का उद्देश्य रूस के ऊर्जा निर्यात से होने वाली आय को प्रभावित करना बताया गया है। यह विधेयक अभी कानून नहीं बना है। अगले चरण में इसे अमेरिकी संसद के निचले सदन, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स, में भेजा जाएगा। यदि वहां भी इसे मंजूरी मिलती है, तो इसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के हस्ताक्षर के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद ही यह विधेयक कानून का रूप ले सकेगा। इस प्रस्ताव का प्रारंभिक मसौदा 23 जुलाई को पेश किया गया था। शुरुआती मसौदे में रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने का प्रावधान रखा गया था। बाद में संशोधन के बाद प्रस्तावित अधिकतम टैरिफ को घटाकर 100% कर दिया गया।उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भारत ने जून 2026 में रूस से प्रतिदिन 26.1 लाख बैरल कच्चे तेल का आयात किया। यह देश के कुल कच्चे तेल आयात का 52.4% रहा। मई 2026 की तुलना में जून में रूस से तेल आयात में लगभग 39% की वृद्धि दर्ज की गई। रूस लगातार भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है।

विधेयक में रूस से प्राकृतिक गैस खरीदने वाले चीन, फ्रांस, जापान, हंगरी और बेल्जियम का भी उल्लेख किया गया है। साथ ही इसमें यह प्रावधान रखा गया है कि जो देश रूस की कुल गैस निर्यात का 15% से कम आयात करते हैं और अपनी निर्भरता कम करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं, उन्हें टैरिफ से छूट मिल सकती है।

15 यूरोपीय देशों को इस आधार पर संभावित 100% टैरिफ से राहत देने का प्रावधान

प्रस्ताव के अनुसार 15 यूरोपीय देशों को इस आधार पर संभावित 100% टैरिफ से राहत देने का प्रावधान किया गया है कि वे रूस से 15% से कम प्राकृतिक गैस आयात करते हैं और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों की ओर बढ़ रहे हैं। डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह विधेयक यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं, बल्कि उन देशों को लक्ष्य बनाता है जो रूस के ऊर्जा कारोबार को आर्थिक समर्थन दे रहे हैं। विधेयक में रूस के ऊर्जा क्षेत्र, वित्तीय संस्थानों, रक्षा औद्योगिक ढांचे, कारोबारियों और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पर प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव भी शामिल हैं।

 

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