
नयी दिल्ली, 07 अगस्त (वार्ता) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के ‘जेन जी’ और ‘जेन अल्फा’ के विरोध प्रदर्शनों का समर्थन करने के एक दिन बाद सांसद कंगना रनौत ने शुक्रवार को यू-टर्न लेते हुए युवा प्रदर्शनकारियों को देश की ‘ताकत’ और ‘सांस्कृतिक राजदूत’ बताया है। इससे पहले उन्होंने इस पीढ़ी को ‘गटर’ कहा था, जिस पर काफी विवाद हुआ था।
सुश्री रनौत ने नीट पेपर लीक के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे युवाओं के बारे में अपनी पिछली टिप्पणियों से पलटते हुए संसद परिसर में शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा, “जेन जी हमारे देश की ताकत और एक बड़ी संपत्ति है। हमें बहुत खुशी है कि हमारे युवा तेजी से हमारी संस्कृति और पहचान के दूत के रूप में उभर रहे हैं।”
इससे पहले सांसद ने युवाओं को ‘गटर जेनरेशन’ कहते हुए उनपर आक्रामक व्यवहार करने तथा व्यक्तिगत जवाबदेही की कमी का आरोप लगाया था। सोशल मीडिया पर इसकी कड़ी आलोचना हुई थी। शुक्रवार को उन्होंने श्री भागवत की युवाओं के साथ हुई बातचीत की सराहना की और कहा कि प्रधानमंत्री को गाली देने वाले कुछ मुट्ठी भर लोग पूरी ‘जेन जी’ पीढ़ी का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं।
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में गुरुवार को एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन बातचीत का एक वैध तरीका है। उन्होंने कहा था, “अगर जेन जी आंदोलन कर रहे हैं, तो वे राष्ट्र-विरोधी नहीं हैं। वे हमारे अपने लोग हैं, हमारी अगली पीढ़ी हैं।”
इस बीच, कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने भी संसद भवन परिसर में कहा कि युवाओं को आरएसएस प्रमुख से किसी प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर संसद से बचने का आरोप लगाया और नीट पेपर लीक के विरोध के दौरान छात्रों पर कथित पुलिस ज्यादती की जिम्मेदारी सरकार द्वारा लिए जाने की मांग की।
विश्लेषकों का मानना है कि संघ का यह रुख शिक्षा और नौकरियों जैसे मुद्दों पर मुखर युवा पीढ़ी से जुड़ने और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेताओं के आक्रामक बयानों से खुद को अलग करने का एक प्रयास है। राजनीतिक रूप से इसे एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, क्योंकि युवा और पहली बार मतदान करने वाले मतदाता एक बड़ा चुनावी वर्ग बनते जा रहे हैं।
