माझी पसंत माझा निर्णय: बदलते सामाजिक मूल्यों को रेखांकित करता संवेदनशील नाटक

इंदौर: 21 वीं सानंद नाट्य स्पर्धा में गुरुवार को ग्वालियर की संस्था आर्टिस्ट कंबाइन ने तारिणी जयराम पुरंदरे लिखित और दिग्दर्शित मराठी नाटक माझी पसंत माझा निर्णय की रोचक और पारिवारिक प्रस्तुति दी.
यह नाटक आज के बदलते सामाजिक परिवेश में विवाह, पीढ़ियों के बीच वैचारिक टकराव और पारिवारिक रिश्तों की गरिमा को बेहद सहज और प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करता है. यह नाटक केवल प्रेम विवाह और पारंपरिक विवाह के बीच के मतभेद तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इस प्रश्न को भी उठाता है कि परिवार का वास्तविक आधार अधिकार नहीं, बल्कि विश्वास, संवाद और स्वीकार्यता है. माझी पसंत माझा निर्णय अंततः यही संदेश देता है कि रिश्तों की मजबूती किसी एक की जीत या हार में नहीं, बल्कि परस्पर सम्मान, संवाद और स्वीकार्यता में निहित होती है.ॉ

कहानी..
कहानी एक मध्यमवर्गीय परिवार के इर्द-गिर्द घूमती है. माता-पिता अपने बेटे राहुल के लिए अपनी पसंद की संस्कारी बहू चाहते हैं, जबकि राहुल अपने जीवनसाथी का चुनाव स्वयं करता है. यही निर्णय परिवार में भावनात्मक दूरी पैदा कर देता है. कथा का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ तब आता है, जब पेइंग गेस्ट सोनाली परिवार में प्रवेश करती है. उसका संवेदनशील और संतुलित दृष्टिकोण टूटते रिश्तों को जोड़ने का माध्यम बनता है. सोनाली का चरित्र यह संदेश देता है कि कई बार परिवार के भीतर संवाद की शुरुआत किसी तीसरे की निष्पक्ष समझ से भी हो सकती है. लेखिका तारिणी जयराम पुरंदरे ने अत्यंत सरल, स्वाभाविक और जीवन के निकट लगने वाला कथानक रचा है. संवादों में कृत्रिमता नहीं, बल्कि रोजमर्रा के पारिवारिक जीवन की सहजता दिखाई देती है. उन्होंने बिना किसी उपदेशात्मक शैली के यह स्थापित किया है कि समय के साथ सामाजिक सोच बदलती है और परिवारों को भी संवेदनशीलता के साथ इन परिवर्तनों को स्वीकार करना चाहिए.

Next Post

स्मार्ट सिटी के दावों पर बारिश का पानी, सड़कें बनीं तालाब

Fri Aug 7 , 2026
इंदौर: स्मार्ट सिटी के दावों की हर बार बरसात पोल खोल देती है. करोड़ों रुपए के विकास कार्यों के बावजूद सड़कें तालाब बन जाती हैं, जल निकासी ठप पड़ती है और घंटों जाम में फंसी जनता नगर निगम की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठा रही है. इंदौर स्मार्ट सिटी के […]

You May Like