इंदौर: स्मार्ट सिटी के दावों की हर बार बरसात पोल खोल देती है. करोड़ों रुपए के विकास कार्यों के बावजूद सड़कें तालाब बन जाती हैं, जल निकासी ठप पड़ती है और घंटों जाम में फंसी जनता नगर निगम की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल उठा रही है.
इंदौर स्मार्ट सिटी के नाम पर सड़क चौड़ीकरण, सुंदरीकरण और अन्य विकास कार्यों पर करोड़ों रुपए खर्च कर दिए, लेकिन हर बारिश के साथ इन दावों की हकीकत सामने आ ही जाती है. शहर के कई प्रमुख मार्गों पर कई जगहों पर दो दो फीट तक पानी भर जाता है, जिससे वाहन चालकों, राहगीरों और व्यापारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से थोड़ी देर की बारिश भी घंटों लंबे ट्रैफिक जाम का कारण बन जाती है. यह समस्या कोई नई नहीं है, बल्कि पिछले कई वर्षों से हर मानसून में यही हालात देखने को मिल रहे हैं. पिछले वर्ष भी नगर निगम ने जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान का दावा किया था, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव दिखाई नहीं दिया. अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले दिनों में लगातार बारिश की संभावना जताई जा रही है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अगले साल भी शहरवासियों को जलभराव, जाम और अव्यवस्था की यही पुरानी यातना झेलनी पड़ेगी या नगर निगम अपने दावों को धरातल पर उतार पाएगा?
इनका कहना है…
हर साल बारिश में सड़कें तालाब बन जाती हैं, घर से निकलना मुश्किल हो जाता है, घंटों जाम में फंसना पड़ता है. करोड़ों रुपए खर्च होने के बावजूद निगम आज तक स्थायी समाधान नहीं दे पाया.
– प्रवीण मिश्रा
थोड़ी बारिश में ही सड़कें डूब जाती हैं, वाहन बंद हो जाते हैं, लंबा जाम लग जाता है और समय के साथ आर्थिक नुकसान भी होता है. निगम को जल निकासी की व्यवस्था तत्काल सुधारनी चाहिए.
– मुकेश वर्मा
निगम द्वारा स्मार्ट सिटी के दावों की असली तस्वीर हर मानसून में सामने आ जाती है. विकास कार्यों पर खर्च तो हुआ, लेकिन जलभराव की समस्या जस की तस है, अब जवाबदेही तय होना जरूरी है.
– बंटी जरवाल
