मोस्ट स्टाइलिश एक्टर्स में से एक थे फिरोज खान, फिल्म हिट होने पर नोट गिनने के लिए रखनी पड़ी थी

Feroz Khan Birthday: मुंबई, भारतीय सिनेमा के सबसे स्टाइलिश एक्टर और डायरेक्टर फिरोज खान की जन्मदिन पर जानिए उनकी जिंदगी, सुपरहिट फिल्मों और उनकी अपनी खास शर्तों पर काम करने के अंदाज से जुड़े दिलचस्प किस्से।
हिंदी सिनेमा की हिस्ट्री में कई बड़े सितारे आए और गए, लेकिन जो खास अंदाज और टैलेंट फिरोज खान ने बड़े पर्दे पर दिखाया, उसकी मिसाल आज भी दी जाती है। 25 सितंबर 1939 को बैंगलोर में जन्मे जुल्फिकार अली शाह खान यानी फिरोज खान ने अपनी एक्टिंग और डायरेक्शन से बॉलीवुड में एक नई क्रांति ला दी थी। 70 और 80 के दशक में उन्होंने हिंदी सिनेमा को ऐसे मोड़ पर पहुंचाया, जहां स्टाइल और एक्शन एक साथ पर्दे पर गरजते थे।

उनकी फिल्म ‘कुर्बानी’ की सफलता का किस्सा तो आज भी इंडस्ट्री में बेहद फेमस है। महज 1.55 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस फिल्म ने घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 6 करोड़ रुपये से ज्यादा की रिकॉर्डतोड़ कमाई की थी। मुंबई के सिनेमाघरों में यह फिल्म लगातार 3 महीने तक हाउसफुल चलती रही। कहा जाता है कि इस फिल्म से हुई बेतहाशा कमाई के नोट गिनने के लिए फिरोज खान को बाकायदा लोगों की एक अलग टीम रखनी पड़ गई थी।

रविवार की छुट्टी के लिए ठुकरा दी सुपरहिट फिल्म
फिरोज खान उन गिने-चुने एक्टर्स में शामिल थे, जिन्होंने अपने करियर में कभी भी अपने उसूलों से समझौता नहीं किया। वे हमेशा अपनी शर्तों पर काम करने के लिए जाने जाते थे, चाहे सामने कितनी भी बड़ी फिल्म या डायरेक्टर क्यों न हो।

साल 1976 में जब फेमस डायरेक्टर प्रकाश मेहरा अपनी नई फिल्म ‘हेरा फेरी’ का ऑफर लेकर उनके पास पहुंचे, तो फिरोज खान ने एक बेहद हैरान करने वाली वजह से फिल्म करने से इनकार कर दिया। दरअसल वे रविवार के दिन काम करना बिल्कुल पसंद नहीं करते थे और फिल्म की शूटिंग संडे को रखी गई थी। उनके इस फैसले के बाद यह किरदार अमिताभ बच्चन के पास चला गया और फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई।

छोटे रोल से शुरू हुआ बॉलीवुड का सफर
अपनी स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद जब फिरोज खान मुंबई पहुंचे, तो रास्ता इतना आसान नहीं था। उन्होंने साल 1956 में आई फिल्म ‘हम सब चोर हैं’ से एक बहुत ही छोटे रोल के साथ अपने फिल्मी सफर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने ‘जमाना’, ‘बड़े सरकार’ और ‘दीदी’ जैसी फिल्मों में को-एक्टर का रोल निभाया।

बतौर मुख्य एक्टर उनकी पहली फिल्म ‘घर की लाज’ थी, जिसमें निरूपा रॉय उनके साथ रोल में नजर आई थीं। हालांकि उनके करियर को असली पहचान फणी मजूमदार की फिल्म ‘ऊंचे लोग’ से मिली, जो उनके करियर की पहली बड़ी हिट साबित हुई। अपने 5 दशक लंबे करियर में उन्होंने 60 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और ‘आरजू’, ‘सफर’, ‘मेला’, ‘अपराध’, ‘धर्मात्मा’, ‘जांबाज’ और ‘वेलकम’ जैसी फिल्मों से लोगों के दिलों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी।

बैंगलोर के अपने फार्महाउस में ली आखिरी सांस
27 अप्रैल 2009 को फेफड़ों के कैंसर के कारण इस महान फिरोज खान का निधन हो गया। मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में लंबे समय तक चले इलाज के दौरान जब उन्हें लगा कि समय कम बचा है, तो उन्होंने अपने होम टाउन बैंगलोर स्थित फार्महाउस जाने की इच्छा जताई। आखिरकार उन्होंने अपने पसंदीदा फार्महाउस में ही अंतिम सांस ली। अपनी शानदार डायलॉग डिलीवरी, स्टाइल और काउबॉय वाले लुक के लिए वे आज भी भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम पन्नों में अमर हैं।

Next Post

मुश्ताक खान के पास नहीं था अपना घर, अमिताभ बच्चन से बताई परेशानी तो तीन दिन में आया फोन और मिल गया फ्लैट

Fri Sep 25 , 2026
मुंबई, मुश्ताक खान ने एक इंटरव्यू में बताया था कि शादी के बाद उनके पास अपना घर नहीं था। उन्होंने अमिताभ बच्चन से मदद मांगी थी। उस समय सांसद रहे बिग बी ने उन्हें एक लेटर दिया। हिंदी सिनेमा के जाने-माने अभिनेता मुश्ताक खान अब हमारे बीच नहीं रहे। करीब पांच […]

You May Like