
नयी दिल्ली, 06 अगस्त (वार्ता) केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) राज्य मंत्री तथा श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने डिजिटल बाजार मंचों के जरिए छोटी मझोली इकाइयों की खरीद पर इंडिया एसएमई फोरम (आईएसएफ) की विस्तृत सर्वे रिपोट ‘डिजिटल भारत: इंडिया डिजिटल प्रोक्योरमेंट रिपोर्ट 2026’ जारी की है। इसका निष्कर्ष है कि देश में 80.4 प्रतिशत एमएसएमई इकाइयां डिजिटल खरीद को अपने कारोबार के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण मानती है।
यह रिपोर्ट केंद्रीय एमएसएमई राज्य मंत्री तथा श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने बुधवार शाम जारी की। इस रिपोर्ट पर आईएसएफ की गुरुवार को जारी विज्ञप्ति में कहा गया है, “सर्वे में 80.4 प्रतिशत एमएसएमई इकाइयों का मानना है कि अगले तीन वर्षों में डिजिटल खरीद उनके कारोबार के विस्तार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। वहीं, 68.7 प्रतिशत एमएसएमई भविष्य में कच्चे माल और 61.3 प्रतिशत मशीनरी एवं उपकरणों की खरीद ऑनलाइन करना चाहते हैं।”
विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह रिपोर्ट देश में एमएसएमई क्षेत्र की खरीद प्रणाली और डिजिटल अपनाने की प्रवृत्ति पर अब तक के सबसे व्यापक अध्ययनों में से एक है। रिपोर्ट के अनुसार, भारत की एमएसएमई खरीद अर्थव्यवस्था का अनुमानित आकार 124.9 लाख करोड़ रुपये है, जो देश के सबसे बड़े व्यावसायिक व्यय क्षेत्रों में से एक है। अध्ययन में विनिर्माण, सेवा और व्यापार क्षेत्र के 27,000 से अधिक एमएसएमई को शामिल किया गया। आईएसएफ के अध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा कि खरीद प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है।डिजिटल मंचों और नीति-निर्माताओं के संयुक्त प्रयास से एमएसएमई को डिजिटल खरीद प्रणाली अपनाने में तेजी लाई जा सकती है।
विज्ञप्ति के अनुसार सर्वेक्षण में शामिल सेवाओं के मूल्यांकन में अमेज़न बिजनेस को मूल्य पारदर्शिता के मामले में सबसे आगे पाया गया। 37.3 प्रतिशत प्रतिभागियों ने इसे अपनी पहली पसंद बताया। वहीं, आपूर्तिकर्ताओं की गुणवत्ता के मामले में भी 32.6 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने इसे सर्वश्रेष्ठ मंच माना। औद्योगिक खरीद और एम्बेडेड फाइनेंस के क्षेत्र में मोग्लिक्स अग्रणी रहा। विज्ञप्ति में सुश्री करंदलाजे के हवाले से कहा गया है कि देश के एमएसएमई विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। डिजिटल खरीद से एमएसएमई की कार्यक्षमता बढ़ेगी, लागत घटेगी, नए बाजारों तक पहुंच आसान होगी और आपूर्ति श्रृंखला मजबूत होगी, जिससे वे देश और वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेंगे।
अमेज़न बिजनेस इंडिया के निदेशक मित्रंजन भादुड़ी ने कहा कि रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि भारत की एमएसएमई खरीद अर्थव्यवस्था में डिजिटल परिवर्तन की अपार संभावनाएं हैं। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के अतिरिक्त सचिव अतीश कुमार सिंह ने कहा कि सरकार ने सार्वजनिक खरीद में एमएसएमई को बढ़ावा देने के लिए मजबूत नीतिगत ढांचा तैयार किया है। अब आवश्यकता इन नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और समय-समय पर सुधार की है ताकि खरीद प्रणाली अधिक पारदर्शी, समावेशी और विकासोन्मुख बन सके।
रिपोर्ट के अनुसार, सर्वेक्षण में शामिल 75 प्रतिशत से अधिक एमएसएमई हर महीने 10 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये के बीच खरीद पर खर्च करते हैं। इसके बावजूद कुल खरीद का केवल 30 से 40 प्रतिशत हिस्सा ही डिजिटल माध्यमों से होता है, जिससे इस क्षेत्र में डिजिटल विस्तार की बड़ी संभावनाएं दिखाई देती हैं। एमएसएमई मंत्रालय के संयुक्त सचिव केशवेंद्र कुमार ने कहा कि यह रिपोर्ट एमएसएमई की प्रतिस्पर्धात्मकता के एक महत्वपूर्ण लेकिन अपेक्षाकृत कम चर्चित पहलू पर उपयोगी जानकारी उपलब्ध कराती है। उन्होंने कहा कि सरकार, डिजिटल मंचों और उद्योग के सहयोग से एक मजबूत डिजिटल खरीद पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा सकता है।
रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्षों के अनुसार, खरीद प्रक्रिया में मूल्य अस्थिरता (55.7 प्रतिशत) सबसे बड़ी चुनौती है। इसके बाद कई आपूर्तिकर्ताओं का प्रबंधन (37.6 प्रतिशत), भुगतान और ऋण संबंधी समस्याएं (35.6 प्रतिशत) तथा एक भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता का अभाव (33.4 प्रतिशत) प्रमुख चुनौतियां हैं।
