सीहोर: अगस्त का पहला सप्ताह बीतने को है, लेकिन जिले में मानसून अब भी अपेक्षित रफ्तार नहीं पकड़ पाया है.अब तक जिले में औसतन 511.5 मिमी करीब 20.14 इंच वर्षा दर्ज की गई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 646.5 मिमी करीब 25. 45 इंच बारिश हुई थी. यानी इस बार अब तक 135 मिमी करीब 5.31 इंच कम वर्षा हुई है. कम बारिश का असर अब जिले की जल संरचनाओं पर साफ दिखाई देने लगा है. जिले के 66 प्रमुख तालाबों में से 27 तालाब पूरी तरह सूखे पड़े हैं, जबकि अधिकांश जलाशय अपनी क्षमता के मुकाबले आधे से भी कम भर पाए हैं. इससे आने वाले समय में पेयजल व्यवस्था और रबी फसल की सिंचाई को लेकर चिंता बढ़ गई है.इस बार मानसून में भी बादल बरसने में कंजूसी बरत रहे हैं.
यही कारण है कि शहर की पेयजल व्यवस्था के लिए सबसे महत्वपूर्ण भगवानपुरा व जमोनिया तालाब भीनहीं भर पाए हैं. भगवानपुरा तालाब की 6.71 एमसीएम क्षमता के मुकाबले केवल 0.70 एमसीएम 10.43 प्रतिशत पानी है, जबकि जमोनिया तालाब में 11.32 एमसीएम क्षमता के विरुद्ध महज 1.50 एमसीएम 12.37 प्रतिशत जल संग्रहित है. आष्टा क्षेत्र के रामपुरा खुर्द डेम में भी 18.67 प्रतिशत पानी बचा है.
यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो करीब 29 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसल की सिंचाई और पलेवा प्रभावित हो सकता है. साथ ही चार हजार से अधिक कुएं, हैंडपंप और ट्यूबवेल पर्याप्त रिचार्ज नहीं हो पाएंगे, जिससे गर्मी के मौसम में पेयजल संकट गहराने की आशंका है. बीते 24 घंटों में जिले में औसतन 0.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई. इस दौरान जावर में सर्वाधिक 3 मिमी तथा सीहोर में 1.2 मिमी बारिश हुई, जबकि श्यामपुर, आष्टा, इछावर, भैरूंदा, बुधनी और रेहटी तहसीलों में वर्षा दर्ज नहीं की गई. अब तक आष्टा में 582 मिमी वर्षा दर्ज की गई है. इसके बाद रेहटी में 555.6 मिमी, बुधनी में 531 मिमी, इछावर एवं भैरूंदा में 527-527 मिमी, जावर में 500 मिमी, सीहोर में 489.8 मिमी तथा श्यामपुर में 380.4 मिमी वर्षा रिकॉर्ड की गई है.
जिले के 27 तालाब अभी भी सूखे
मानसून की बैरुखी के चलते जिले के बरखेड़ी, बरखेड़ा, भाऊखेड़ी, बोरदी टैंक, ढाबला माता, हालियाखेड़ी, इछावर, कालापीपल, कांकडख़ेड़ा, कोनाझिर, लसुडिय़ा कांगर, मूंडला, पांगरा, रामदासी टैंक, रामपुरा, रसूलपुरा, अपर बोरदी, विनायकपुरा, बमुलिया भाटी, मैना-1, मैना-2, पंचापुरा, फूडरा, सेवदा, नींबूखेड़ा सहित जिले के 27 प्रमुख तालाबों में अब तक पानी नहीं पहुंच पाया है. ऐसे में अगर मानसून दगा दे गया तो आगामी गर्मी के दिनों में स्थिति भयावह हो सकती है.
बादलयुक्त मौसम बना रहेगा
आगामी 96 घंटे बाद घेन बादलयुक्त मौसम के साथ कहीं कहीं गरज एवं चमक के साथ बौछारयुक्त भारी वर्षा होने का अनुमान है. दिन और रात के तापमान में मामूली गिरावट रहने के आसार हैं.
डॉ. एसएस तोमर,
मौसम वैज्ञानिक, आरएके
