नयी दिल्ली, 05 अगस्त (वार्ता) केंद्र सरकार ने मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं की रोकथाम और लोगों तथा वन्यजीवों के बीच सह-अस्तित्व सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिक तकनीक, सामुदायिक भागीदारी और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया है। पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में बुधवार को यहां हुई मंत्रालय की संसदीय परामर्श समिति की बैठक में इस विषय पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में बताया गया कि विभिन्न राज्यों में मानव-वन्यजीव संघर्ष का स्वरूप अलग-अलग है। इससे निपटने के लिए एआई, ड्रोन, जीआईएस, जीपीएस ट्रैकिंग, प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली और त्वरित प्रतिक्रिया तंत्र जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग को महत्व दिया जाना चाहिए। समिति को राष्ट्रीय मानव-वन्यजीव संघर्ष पोर्टल और मानव-वन्यजीव संघर्ष उत्कृष्टता केंद्र की प्रगति से भी अवगत कराया गया।इस दौरान असम, कर्नाटक, केरल, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश ने संघर्ष कम करने के लिए अपनाए जा रहे उपायों और सामुदायिक भागीदारी के मॉडल प्रस्तुत किए गये। श्री यादव ने कहा कि वैज्ञानिक प्रबंधन, तकनीक आधारित निगरानी और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी से ही मानव-वन्यजीव संघर्ष का प्रभावी समाधान संभव है।

