
मुंबई, 05 अगस्त (वार्ता) भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने शहरी सहकारी बैंक खोलने के नये लाइेंस जारी करने संबंधी दिशानिर्देशों का मसौदा शीघ्र जारी करने की बुधवार को घोषणा की।आरबीआई मौद्रिक नीति समिति की द्वैमासिक बैठक के निर्णयों और निष्कर्षों की जानकारी देते हुए आरबीआई गवर्नर ने अपने वक्व्य में कहा, “शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के लाइसेंसिंग संबंधी चर्चा-पत्र पर प्राप्त सुझावों के आधार पर, हम शहरी सहकारी बैंकों को पुनः लाइसेंस जारी करने के लिए मसौदा दिशानिर्देश जारी कर रहे हैं।” उन्होंने कहा, “वर्ष 2008 में ग्रामीण सहकारी बैंकों के लिए कर्जों की निगरानी व्यवस्था में अंतिम बार संशोधन किए जाने के बाद प्राप्त अनुभव तथा इस अवधि के दौरान हुए विकास को ध्यान में रखते हुए, इस व्यवस्था की व्यापक समीक्षा के उपरांत हम मसौदा निर्देश जारी कर रहे हैं।”
रिजर्व बैंक ने शहरी सहकारी बैंकों के लाइसेंसिंग पर एक चर्चा-पत्र इसी साल 13 जनवरी को हितधारकों से सुझाव प्राप्त करने के लिए प्रकाशित किया गया था। लगभग दो दशकों के अंतराल के बाद नए लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया पर प्राप्त सुझावों का विश्लेषण करने के उपरांत यह निर्णय लिया गया है कि शहरी सहकारी बैंकों को ‘ऑन-टैप’ (निरंतर आवेदन हेती खुली व्यवस्था) के आधार पर पुनः लाइसेंस जारी किए जाएंगे। इस संबंध में मसौदा दिशानिर्देश शीघ्र ही हितधारकों से परामर्श हेतु जारी किए जाएंगे। ग्रामीण सहकारी बैंकों में असंतुलित ऋण जोखिम के प्रबंधन से संबंधित सावधानीपूर्ण मानदंडों के लिए केंद्रीय बैंक की समीक्षा संबंधी दिशानिर्देश अब तक वर्ष 2008 में जारी दिशानिर्देशों पर आधारित रहे हैं।
आरबीआई ने कहा है कि चूँकि सामान्य रूप से बैंकिंग क्षेत्र तथा विशेष रूप से सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में पिछले वर्षों के दौरान उल्लेखनीय विस्तार एवं परिवर्तन हुए हैं, इसलिए इन निर्देशों की समीक्षा करने का निर्णय लिया गया है। इसका उद्देश्य एक सशक्त एवं गतिशील सहकारी बैंकिंग क्षेत्र का विकास करना है, साथ ही अत्यधिक केंद्रित ऋण वितरण से उत्पन्न होने वाली चिंताओं का समाधान करना भी है। इस संबंध में मसौदा संशोधन निर्देश व्यापक हितधारक परामर्श हेतु जारी किए जा रहे हैं|
