चिटनिस-दादू के मंत्री बनने की आस

मालवा- निमाड़ की डायरी

संजय व्यास

दतिया उपचुनाव से फुरसत के बाद मध्यप्रदेश मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर एक बार फिर चर्चाएं जोरो पर हैं. बुरहानपुर और नेपानगर विधायक ने अपना रुख लॉबिंग की ओर कऱ लिया है. बुरहानपुर विधायक, प्रदेश भाजपा प्रवक्ता, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य, पूर्व कैबिनेट मंत्री श्रीमती अर्चना चिटनिस को दतिया चुनाव में प्रचार की महत्वपूर्ण भूमिका प्रदान करने से उनके पुन: मंत्री मंडल में शामिल होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं. चिटनिस ने 2003 से 2018 तक विधान सभा जीतकर यहां हैट्रिक लगाई थी और हर बार मंत्री मंडल में जगह बनाई. 2018 के चुनाव में उन्हें निर्दलीय सुरेंद्र सिंह शेरा के सामने मात मिली थी. 2023 में चिटनिस ने पुन: विधान सभा में वापसी की, लेकिन मोहन यादव के प्रारंभिक मंत्री मंडल में आशा के बावजूद स्थान नहीं मिला.

अब मंत्री मंडल विस्तार की चर्चाओं के बीच फिर क्षेत्रवासियों को उनके मंत्री बनने की आस बलबती हुई है. वहीं नेपानगर विधायक मंजू दादू का भी भोपाल और दिल्ली दौरा चर्चाओं में है. दूसरी बार विधायक बनीं मंजू के पास अपने पिता राजेंद्र दादू के पार्टी में योगदान का सहारा है और अनुसूचित वर्ग से आने के कारण व दूसरी बार विधायक चुने जाने को लेकर समर्थक उनके मंत्री मंडल में शामिल किए जाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं. फिलहाल चिटनिस -दादू जनता के बीच विकास को लेकर सक्रिय हैं. दोनों अपने-अपने क्षेत्रों में विकास के लिए योजनाएं लाने को जुटी हैं. सरकार द्वारा विकास को लेकर करोड़ों की सौगाते निरंतर जारी होने से दोनों के बीच प्रतिस्पर्धा दिखाई दे रही है.

अपनी जमीन तैयार कर रहे गुर्जर

किसान नेता मंदसौर कांग्रेस जिलाध्यक्ष महेंद्र सिंह गुर्जर विधान सभा चुनाव के लिए अपनी जमीन तैयार करने की मशक्कत कर रहे हैं. वे 2 बार कांग्रेस से विधान सभा चुनाव लड़ चुके हैं, पर सफलता नहीं मिली. इस बार वे अभी से मेहनत कर रहे हैं. जिले में मतदाताओं का रुख कांग्रेस की ओर मोडऩे के लिए उनके सामने 2027 के निकाय-पंचायत चुनाव हैं. जिले में बूथ एवं पंचायत स्तर तक संगठन का शत-प्रतिशत गठन पूर्ण होने के बाद अब गुर्जर का लक्ष्य संगठन के विस्तार के साथ-साथ एकता, समन्वय, अनुशासन और सक्रियता बढ़ाना है. इसी दिशा में उनका बैठकों का दौर चल रहा है. जहां जा रहे हैं वे कार्यकर्ताओं से आगामी नगरीय निकाय एवं पंचायत चुनावों की तैयारियों में अभी से जुटने का आह्वान करते नजर आ जाते हैं. वे विधान सभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव के जरिए कांग्रेस को एकजुटता के साथ मजबूत स्थिति में लाने का ध्येय लेकर आगे बढ़ रहे हैं.

पूर्व नप अध्यक्ष के मंसूबे धरे रह गए

निकाय चुनाव लडऩे की तैयारी कर रहे नीमच जिले की रामपुरा नगर परिषद के पूर्व अध्यक्ष यशवंत करेल पर अयोग्यता की गाज गिर गई. उन्हें निर्माण कार्यो में वित्तीय अनियमितता का दोषी पाया गया था. अतिरिक्त कक्ष निर्माण तथा शासकीय चिकित्सालय के आवासीय भवन निर्माण कार्यों में निविदा प्रक्रिया एवं न्यूनतम दरों की स्वीकृति में गंभीर अनियमितताओं के मामले में लोकायुक्त जांच में संबंधित अधिकारियों की रिपोर्ट एवं उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर उनकी भूमिका को उत्तरदायी माना गया. इसके बाद प्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग ने 5 वर्ष की अवधि के लिए किसी भी स्थानीय निकाय का चुनाव लडऩे से अयोग्य घोषित कर दिया. जांच में दोषी पाए जाने के बाद करेल न्यायालय की शरण में पहुंचे थे, पर उन्हें उस दर से भी बिना राहत खाली हाथ लौटना पड़ा और उनके आगामी चुनाव लडऩे के मंसूबे पर पानी फिर गया

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