खंडवा: मैं हूं झुमरू…, रूप तेरा मस्ताना…, पल-पल दिल के पास… और जिंदगी एक सफर है सुहाना… जैसे अमर गीतों से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले हरफनमौला कलाकार किशोर कुमार की जन्मस्थली खंडवा एक बार फिर उनकी यादों में सराबोर है। 4 अगस्त को उनकी जयंती पर पूरा शहर अपने चहेते कलाकार को श्रद्धांजलि अर्पित करेगा। तीन दिवसीय खंडवा गौरव दिवस के समापन पर समाधि स्थल पर पुष्पांजलि, स्वरांजलि और शाम को भव्य किशोर नाइट का आयोजन होगा। इस वर्ष समारोह का सबसे बड़ा आकर्षण मुंबई के प्रसिद्ध पार्श्वगायक विनोद राठौर को एक लाख रुपये, ताम्रपत्र और ‘किशोर सम्मान’ से सम्मानित किया जाना है।
समाधि पर लगेगा पसंदीदा दूध-जलेबी का भोग :
किशोर कुमार का खंडवा और यहां की दूध-जलेबी से विशेष लगाव था। वे अक्सर मुस्कुराते हुए कहते थे, दूध-जलेबी खाएंगे, खंडवा में बस जाएंगे। इसी आत्मीय जुड़ाव की स्मृति में हर वर्ष उनकी समाधि पर दूध-जलेबी का भोग लगाया जाता है। देशभर से आने वाले प्रशंसक यहां उनके गीत गाकर और पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देते हैं।
अधूरी रह गई खंडवा लौटने की इच्छा :
फिल्मी दुनिया में अपार सफलता के बावजूद किशोर कुमार का मन हमेशा अपनी जन्मभूमि खंडवा में ही बसता था। वे अक्सर खुद को खंडवा वाला किशोर कहकर परिचित कराते थे और जीवन के अंतिम दिन अपने शहर में बिताने की इच्छा व्यक्त करते थे। हालांकि 13 अक्टूबर 1987 को उनका निधन हो गया और यह सपना अधूरा रह गया। उनकी अंतिम इच्छा के अनुरूप उनका अंतिम संस्कार खंडवा में ही किया गया।
तीन दिन तक गूंजे किशोर दा के गीत :
2 अगस्त को खंडवा रन और वॉइस ऑफ खंडवा ग्रैंड फिनाले के साथ गौरव दिवस की शुरुआत हुई। 3 अगस्त को विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं, पेंटिंग प्रतियोगिता आयोजित हुई और नगर निगम चौक सहित शहर में सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। स्थानीय व्यंजनों के फूड स्टॉल भी आकर्षण का केंद्र बने।
4 अगस्त को सुबह 9 बजे किशोर कुमार की समाधि पर पुष्पांजलि और स्वरांजलि दी जाएगी। शाम 7:30 बजे पुरानी कृषि उपज मंडी परिसर में किशोर नाइट आयोजित होगी, जिसमें पी गणेश और प्रीति जोशी किशोर कुमार के लोकप्रिय गीत प्रस्तुत करेंगे।
विनोद राठौर को मिलेगा किशोर सम्मान:
इस वर्ष का प्रतिष्ठित किशोर सम्मान मुंबई के सुप्रसिद्ध पार्श्वगायक विनोद राठौर को प्रदान किया जाएगा। उन्हें गायन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए एक लाख रुपये की सम्मान राशि, ताम्रपत्र और सम्मान से अलंकृत किया जाएगा। यह सम्मान समारोह का प्रमुख आकर्षण रहेगा।
आज भी जब उनकी समाधि पर सुरों की स्वरांजलि गूंजती है और शहर की गलियों में उनके गीत सुनाई देते हैं, तो लगता है मानो खंडवा वाला किशोर अपनी जन्मभूमि की मिट्टी में आज भी मुस्कुरा रहा हो।
