वाशिंगटन, ट्रंप के नए टैरिफ के खिलाफ अमेरिका के 25 राज्यों ने मोर्चा खोल दिया है। सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद नए कानून के तहत लगाए गए इन टैक्सों को राज्यों ने अवैध बताते हुए मुकदमा दायर किया है।
अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नए टैरिफ फैसलों को लेकर एक बड़ा कूटनीतिक और कानूनी संकट खड़ा हो गया है। सोमवार को अमेरिका के 25 राज्यों ने एकजुट होकर ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है।
इन राज्यों का सीधा आरोप है कि प्रशासन उन इंपोर्ट टैक्स को पिछले दरवाजे से दोबारा लागू करने की कोशिश कर रहा है, जिन्हें इसी साल फरवरी में देश की सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक करार देते हुए रद्द कर दिया था।
क्या है पूरा विवाद?
पूरा विवाद 1977 के ‘इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट’ (IEEPA) के इस्तेमाल से जुड़ा है। ट्रंप ने इस पुराने कानून का सहारा लेकर लगभग हर देश से होने वाले आयात पर भारी टैक्स थोप दिया था, जिसे उन्होंने ‘नेशनल इमरजेंसी’ बताया था।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट कर दिया कि IEEPA के तहत इस तरह के टैरिफ लगाने की अनुमति नहीं है। इस अदालती हार के बाद ट्रंप प्रशासन को उन आयातकों को पैसे भी लौटाने पड़े जिनसे टैक्स वसूला गया था। अब प्रशासन ने ‘ट्रेड एक्ट ऑफ 1974’ की धारा 301 का इस्तेमाल कर दोबारा टैरिफ लागू कर दिए हैं।
किन देशों पर होगा असर?
नई नीति के तहत ट्रंप प्रशासन ने 59 देशों और यूरोपीय संघ से आने वाले सामानों पर 10% से 12.5% तक का स्थायी टैरिफ लगा दिया है। खास बात यह है कि ये देश अमेरिका में होने वाले कुल आयात का लगभग 99 प्रतिशत हिस्सा कवर करते हैं।
ट्रंप सरकार का तर्क है कि यह कदम उन देशों को दंडित करने के लिए है जो जबरदस्ती मजदूरी से बने सामान अमेरिका भेज रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप का मानना है कि ऊंचे टैरिफ से विदेशी निर्भरता कम होगी और अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को बढ़ावा मिलेगा।
क्या है राज्यों का विरोध?
न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स ने इस फैसले को अवैध बताया है। उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में हारने के बाद प्रशासन अब घुमा-फिराकर परिवारों और स्थानीय व्यवसायों पर टैक्स का बोझ डाल रहा है। राज्यों का दावा है कि ये नए टैरिफ केवल उन पुराने रद्द किए गए टैक्सों की भरपाई करने का एक बहाना हैं।
वॉइट हाउस का रुख दूसरी तरफ
वॉइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने सरकार के कदम को सही ठहराया है। उन्होंने कहा कि धारा 301 एक शक्तिशाली और कानूनी हथियार है जिसका उपयोग उन अनुचित व्यापार नीतियों को खत्म करने के लिए किया जा रहा है जो अमेरिकी कामगारों के हितों को नुकसान पहुंचाती हैं। फिलहाल यह मामला अब अदालती गलियारों में है, जहां 25 राज्यों की चुनौती ट्रंप प्रशासन की आर्थिक नीतियों के लिए बड़ी परीक्षा साबित हो सकती है।
