जेठमलानी की खरगे को दो टूक: टैक्सपेयर्स के पैसे या विदेशी फंडिंग पर नहीं, अपने दम पर चलता है RSS

नई दिल्ली: कर्नाटक के मंत्री प्रियंक खरगे द्वारा संघ प्रमुख मोहन भागवत को संघ के रजिस्ट्रेशन और फंडिंग को लेकर लिखे पत्र पर वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने पलटवार करते हुए कानूनी स्थिति स्पष्ट की है। जेठमलानी ने खरगे की मांग को संवैधानिक जांच नहीं, बल्कि वंशवादी राजनीति का अहंकार और राजनीतिक उकसावा करार दिया है।

​जेठमलानी ने साफ किया कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में नागरिकों को स्वैच्छिक संगठन बनाने का अधिकार है। RSS एक स्वतंत्र संगठन है, जिसे अस्तित्व में रहने के लिए किसी मंत्री के प्रमाण पत्र या कांग्रेसी नेता की पॉलिटिकल परमिशन स्लिप की कोई आवश्यकता नहीं है।

​फंडिंग और टैक्स के विवाद पर वरिष्ठ वकील ने कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स बनाम राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मामले में पटना हाईकोर्ट के ऐतिहासिक फैसले का हवाला दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अदालत पहले ही परस्परता के सिद्धांत के तहत स्वयंसेवकों द्वारा दी जाने वाली स्वैच्छिक गुरुदक्षिणा को टैक्स-फ्री घोषित कर चुकी है।

​लॉर्ड डेनिंग के सिद्धांत का जिक्र करते हुए जेठमलानी ने कहा कि पद चाहे कितना भी बड़ा हो, कानून हमेशा ऊपर रहता है। उन्होंने तंज कसा कि जहाँ RSS 100 साल से भारतीय धूप में पूरी पारदर्शिता के साथ देश सेवा कर रहा है, वहीं कांग्रेस के नेता चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ गुप्त समझौतों की विदेशी परछाइयों में सहज महसूस करते हैं। खरगे का पत्र कानूनी अज्ञानता और राजनीतिक द्वेष का नमूना है।

 

 

 

 

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