जबलपुर: मध्यप्रदेश मेडिकल साइंस यूेनिवर्सिटी के विभाजन में उज्जैन के बराबर का जबलपुर का भी हिस्सा बनाया जाए जिससे जबलपुर एम यू आर्थिक रूप से सुदृढ़ हो सके। साथ ही वर्तमान एम यू के 250 करोड़ के रिजर्व फण्ड के बँटवारे पर रोक लगे। इन ठोस निर्णय से ही 1 अगस्त को मुख्यमंत्री द्वारा जबलपुर एम यू को एम्स जैसे करने के कथन पर अमल किया जा सकेगा। ये बातें सोमवार को जनसंगठनों के द्वारा आयोजित बैठक में दौरान हुईं।
डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने बताया कि 20 जुलाई को विधानसमा सचिवालय द्वारा राजपत्र में प्रकाशित विधेयक से स्पष्ट हो गया है कि उज्जैन में 6 संभाग के 70 कॉलेज तथा 60 हजार छात्र होंगे, लेकिन जबलपुर में 4 संभाग के 15 कॉलेज तथा 12 हजार छात्र होंगे। इस कारण कुल 110 करोड़ के बजट में जबलपुर का मात्र 10 करोड़ का हिस्सा होगा।
ऊपर से अब 250 करोड़ के रिजर्व फंड के बंटवारे का भी प्रस्ताव बन चुका है, जिसमें लगभग 200 करोड़ उज्जैन को तथा 50 करोड़ जबलपुर को मिलेंगे।
सीएम से की मांग
वहीं छात्रों, बजट तथा रिजर्व फण्ड की कमी के कारण आगामी वर्षों में जबलपुर एम यू का अस्तित्व खतरे में पड़ेगा। ऐसे में मुख्यमंत्री का कथन केवल कागजों तक सीमित रहेगा। जानकारी के अनुसार इन मुद्दों पर जनसंगठनों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को निवेदन पत्र भी सौंपा है और एमयू के अस्तित्व को बचाने की मांग की है। बैठक में रजत मार्गव, डॉ. ए. बी. श्रीवास्तव, सुमाष चन्द्रा, टी.के. रायघटक, एड. वेदप्रकाश अघौलिया, संतोष श्रीवास्तव, डी. के. सिंह, एड. घनश्याम सोनकर, यशवंत कोष्टा, डी. आर. लखेरा, अशोक यादव, श्याम सोलंकी, एड. बृजेश साहू तथा राममिलन शर्मा उपस्थित थे
