स्ट्रेचर नहीं मिला तो मरीज को लेकर वार्ड तक पहुंच गया ई रिक्शा

सतना: जिला चिकित्सालय में रविवार को एक इलेक्ट्रिक ऑटो के हड्डी वार्ड के सामने तक पहुंचने से कुछ देर के लिए हडक़ंप मच गया। सुरक्षा गार्डों ने ऑटो चालक को पकडक़र पुलिस चौकी के हवाले कर दिया, लेकिन जब पूरी कहानी सामने आई तो यह मामला सुरक्षा चूक से ज्यादा अस्पताल की बदहाल व्यवस्था और एक ऑटो चालक की इंसानियत की मिसाल बनकर सामने आया।प्राप्त जानकारी के अनुसार ऑटो में सवार मरीज संतोष अग्रवाल ने बताया कि सडक़ दुर्घटना में उनका पैर टूट गया है और उनका ऑपरेशन होना है। फिलहाल खून की कमी के कारण उन्हें वार्ड क्रमांक-4 में भर्ती किया जाना था।

मरीज के मुताबिक वह अस्पताल में अकेले थे और मेन गेट पर उन्हें वार्ड तक ले जाने के लिए न तो स्ट्रेचर मिला और न ही कोई सहयोगी। ऐसे में उन्होंने ऑटो चालक से वार्ड तक छोडऩे की गुजारिश की। मरीज की परेशानी को देखते हुए चालक ने मानवता दिखाते हुए ऑटो सीधे वार्ड के गेट तक पहुंचा दिया। हालांकि अस्पताल के अंदर ऑटो पहुंचते ही सुरक्षा गार्ड सक्रिय हुए और चालक को पकडक़र पुलिस चौकी ले गए जहां उससे पूछताछ की गई। मामले में सिविल सर्जन डॉ अमर सिंह ने बताया कि “दोपहर एक ई रिक्शा चालक मरीज को लेकर अस्पताल के अंदर प्रवेश कर गया था.

जिसे हमारे सुरक्षा गार्ड ने पकडक़र अस्पताल पुलिस चौकी के हवाले कर दिया. लोग जबरदस्ती कभी बाइक तो कभी ई रिक्शा लेकर अस्पताल के अंदर घुस रहे हैं. वहीं इस मामले पर पुलिस के द्वारा कार्रवाई की जा रही है.”      व्यवस्था पर फिर उठे सवालयह घटना जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करती है। यदि प्रवेश द्वार पर मरीजों के लिए समय पर स्ट्रेचर और सहायक कर्मचारी उपलब्ध होते तो शायद ऑटो चालक को ऐसा कदम उठाने की जरूरत ही नहीं पड़ती।

गंभीर मरीज को तत्काल इलाज दिलाने की कोशिश में चालक ने नियमों का उल्लंघन जरूर किया लेकिन उसका उद्देश्य केवल मरीज की मदद करना था।    पहले भी यही थी वजहयह पहली बार नहीं है जब अस्पताल की अव्यवस्था के कारण किसी वाहन को वार्ड तक ले जाना पड़ा हो। इससे पहले 30 मई को भी स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं होने पर एक युवक अपने मरीज को लेने बाइक से फर्स्ट फ्लोर स्थित वार्ड तक पहुंच गया था। उस समय मरीज को रीवा रेफर किया जाना था और तत्काल स्थिति को देखते हुए परिजन को केवल समझाइश देकर जाने दिया गया था।

सुनिश्चित हो आधारभूत सुविधा
दोनों घटनाएं यह बताती हैं कि समस्या केवल सुरक्षा व्यवस्था की नहीं, बल्कि मरीजों के लिए मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता की भी है। जब जरूरतमंद मरीज को समय पर स्ट्रेचर नहीं मिलता, तब परिजन और मददगार लोग मजबूरी में ऐसे कदम उठाते हैं। ऐसे में नियमों के पालन के साथ-साथ अस्पताल प्रबंधन को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि किसी मरीज को इलाज तक पहुंचने के लिए इस तरह की मजबूरी का सामना न करना पड़े।

Next Post

छतरपुर हॉस्टल कांड: परीक्षा में लौट आएंगे...लिखकर रात 12 बजे भागे 3 छात्र, परिजनों का हंगामा

Mon Aug 3 , 2026
छतरपुर। छतरपुर शहर के सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित सटई रोड पर पीताम्बरा मंदिर के पास संचालित एक निजी हॉस्टल से 10वीं कक्षा के तीन छात्र रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन हॉस्टल पहुंचे और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए हंगामा किया। सूचना […]

You May Like