
सोयतकलां, पिपलिया खेड़ा स्थित प्रसिद्ध बालाजी धाम की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर पूर्व में लगातार समाचार प्रकाशित होने और प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा सुधार के आश्वासन दिए जाने के बावजूद आज तक हालात नहीं बदले हैं. अब जिले में नए कलेक्टर, नए एसडीएम और नए तहसीलदार की पदस्थापना हो चुकी है. ऐसे में श्रद्धालुओं की उम्मीदें एक बार फिर जागी है कि शायद अब वर्षों से चली आ रही अव्यवस्थाओं का स्थायी समाधान हो सके.
मध्यप्रदेश-राजस्थान की सीमा पर स्थित इस प्रसिद्ध धार्मिक स्थल पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं. मंदिर में लाखों रुपए का चढ़ावा आता है, लेकिन श्रद्धालुओं को स्वच्छ पेयजल, नियमित सफाई, कचरा निस्तारण और अन्य मूलभूत सुविधाएं अब भी नहीं मिल पा रही हैं. मंदिर परिसर और आसपास फैली गंदगी श्रद्धालुओं की आस्था को ठेस पहुंचा रही है. अब जिले और तहसील में नए अधिकारी आ चुके हैं. ऐसे में लोगों का कहना है कि नए प्रशासन को पुराने मामलों की समीक्षा कर मौके पर निरीक्षण करना चाहिए और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करनी चाहिए.
श्रद्धालुओं की प्रमुख मांगें
मंदिर परिसर एवं आसपास नियमित साफ-सफाई हो, वर्षों से बंद पड़े वाटर कूलर को तत्काल चालू कराया जाए, श्रद्धालुओं के लिए ठंडे पेयजल की स्थायी व्यवस्था की जाए, कचरा संग्रहण और निस्तारण की उचित व्यवस्था बने, मंदिर समिति और धर्मस्व विभाग की कार्यप्रणाली की जांच हो, आने वाले त्योहारों और मेलों से पहले सभी व्यवस्थाएं दुरुस्त की जाएं.
प्रशासन से सीधी अपील…
पिपलिया खेड़ा बालाजी धाम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि लाखों लोगों की आस्था का केंद्र है. ऐसे धार्मिक स्थल की बदहाल स्थिति पूरे प्रशासनिक तंत्र पर सवाल खड़े करती है. नए जिला कलेक्टर, एसडीएम और तहसीलदार से क्षेत्रवासियों एवं श्रद्धालुओं ने मांग की है कि वे स्वयं मौके का निरीक्षण कर तत्काल प्रभाव से आवश्यक निर्देश जारी करें, ताकि वर्षों से चली आ रही अव्यवस्थाओं का अंत हो सके और श्रद्धालुओं को सम्मानजनक एवं स्वच्छ वातावरण मिल सके.
