विश्व लंग कैंसर दिवस: बिना धूम्रपान के भी बढ़ रहा खतरा, महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित

भोपाल। विश्व लंग कैंसर दिवस पर सामने आए आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में लंग कैंसर अब सबसे ज्यादा मौतों का कारण बनने वाला कैंसर बन चुका है। यह बीमारी अब सिर्फ धूम्रपान करने वालों तक सीमित नहीं रही, बल्कि बढ़ता वायु प्रदूषण, पैसिव स्मोकिंग, घर के अंदर लकड़ी और कोयले के धुएं का संपर्क, रसोई का धुआं और कुछ आनुवंशिक कारण भी इसके पीछे बड़ी वजह बन रहे हैं।

WHO-IARC की Globocan 2024 रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में साल 2024 में 1,12,659 नए लंग कैंसर के मामले सामने आए, जबकि 98,687 लोगों की मौत इस बीमारी से हुई। यही वजह है कि लंग कैंसर देश का सबसे जानलेवा कैंसर बन गया है। डॉक्टरों का कहना है कि महिलाओं में होने वाले 70 से 85 प्रतिशत लंग कैंसर के मामलों का धूम्रपान से कोई संबंध नहीं होता। अस्पतालों में आने वाले करीब 40 प्रतिशत मरीज महिलाएं या ऐसे लोग हैं जिन्होंने कभी धूम्रपान नहीं किया।

भोपाल के कैंसर विशेषज्ञों के अनुसार, 70 प्रतिशत से अधिक मरीजों में लंग कैंसर की पहचान तीसरे या चौथे स्टेज में होती है, क्योंकि लोग लगातार खांसी और सांस फूलने जैसी परेशानी को अक्सर टीबी या सामान्य संक्रमण समझ लेते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर खांसी लंबे समय तक ठीक न हो, सांस लेने में तकलीफ हो, सीने में दर्द, खांसी में खून आए या बिना वजह वजन कम होने लगे, तो तुरंत जांच करानी चाहिए।

इंडियन जर्नल ऑफ मेडिकल रिसर्च के अनुसार, पुरुषों में होने वाले कुल कैंसर मामलों में लंग कैंसर 10.6 प्रतिशत के साथ सबसे ऊपर है, जबकि महिलाओं में यह 3.7 प्रतिशत के साथ पांचवें स्थान पर है। मध्य प्रदेश में लंग कैंसर के मरीजों में 77.9 प्रतिशत पुरुष और 22.1 प्रतिशत महिलाएं हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच, प्रदूषण से बचाव, धूम्रपान और पैसिव स्मोकिंग से दूरी तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इस जानलेवा बीमारी के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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