भोपाल: मध्य प्रदेश के पूर्व एआईजी (AIG) मिश्रा को दुष्कर्म के एक मामले में अदालत ने दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि आरोपी ने अपने वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के पद और प्रभाव का दुरुपयोग कर पीड़िता का शोषण किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत इस निष्कर्ष पर पहुंची कि आरोपी के खिलाफ लगाए गए आरोप सिद्ध होते हैं। मामले में यह भी सामने आया कि पीड़िता की बेटी की अश्लील तस्वीरें खिंचवाने जैसे गंभीर आरोप भी रिकॉर्ड का हिस्सा रहे, जिन्हें अदालत ने बेहद गंभीर अपराध माना।
फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा कि कानून की रक्षा करने वाले अधिकारी से समाज को सबसे अधिक नैतिक जिम्मेदारी की अपेक्षा होती है और ऐसे पद पर रहते हुए अपराध करना विश्वासघात के समान है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरोपी की सामाजिक हैसियत या पूर्व पद उसे कानून से ऊपर नहीं बनाते। सजा सुनाए जाने के बाद आरोपी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। अभियोजन पक्ष ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे पीड़िता को न्याय मिलने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय बताया, जबकि कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला इस बात का संदेश देता है कि प्रभावशाली पदों पर बैठे लोगों के खिलाफ भी कानून समान रूप से लागू होता है।
