भोपाल: मध्यप्रदेश में जुलाई महीने के दौरान कुल मिलाकर औसत वर्षा का लक्ष्य पूरा हो गया है, लेकिन जिलेवार आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार प्रदेश के 55 में से 42 जिलों में सामान्य से कम बारिश दर्ज की गई है। कुछ जिलों में अच्छी बारिश होने से प्रदेश का औसत संतुलित रहा, जबकि कई इलाकों में अब भी बारिश की कमी बनी हुई है। इसका असर खरीफ फसलों, जलाशयों और भूजल स्तर पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। मौसम विभाग ने अगले चार दिनों तक प्रदेश में किसी बड़े बारिश सिस्टम के सक्रिय होने की संभावना से इनकार किया है। हालांकि कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, लेकिन व्यापक स्तर पर भारी बारिश की संभावना फिलहाल नहीं है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अगस्त के पहले सप्ताह में कोई मजबूत मानसूनी सिस्टम सक्रिय नहीं होने के कारण अधिकांश जिलों में भारी वर्षा की उम्मीद कम है। कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को मौसम के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार सिंचाई और खेती से जुड़े निर्णय लेने की सलाह दी है। प्रशासन भी जलभराव और बाढ़ जैसी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है, वहीं कम वर्षा वाले क्षेत्रों में फसलों की स्थिति की समीक्षा की जा रही है। यदि आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं होती है, तो कई जिलों में कृषि उत्पादन प्रभावित होने की आशंका बढ़ सकती है।
