
जबलपुर। फर्जी मेडिकल बिल प्रकरण में शासन को 66.43 लाख रुपये की आर्थिक क्षति पहुंचाने के आरोपों के बीच 16 एएसआई को पदोन्नति दिए जाने का मामला हाईकोर्ट पहुंचा है। जस्टिस विवेक कुमार सिंह की एकलपीठ ने मामले में प्रमुख सचिव गृह, डीजीपी सहित अन्य को नोटिस जारी कर जवाब पेश करने के निर्देश दिये है। एकलपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को निर्धारित की है।
दरअसल यह मामला भोपाल निवासी एएसआई प्रभांशु सिंह की ओर से दायर किया गया है। जिसमें पुलिस मुख्यालय के 13 जुलाई 2026 के उस आदेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत मिनिस्ट्रियल स्टाफ भोपाल के 16 एएसआई को पदोन्नति दी गई। याचिका के अनुसार इन कर्मचारियों से फर्जी मेडिकल बिल मामले में 66.43 लाख रुपये की वसूली का आदेश था। इनमें 12 कर्मचारी पूरी राशि जमा कर चुके हैं, जबकि चार अभी किश्तों में भुगतान कर रहे हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता प्रियंक शांडिल्य ने दलील दी कि मप्र शासन के पदोन्नति नियम-2025 के तहत शासन को हुई आर्थिक क्षति की वसूली लंबित रहने पर संबंधित कर्मचारी पदोन्नति का पात्र नहीं है। वसूली पूरी होने के बाद भी एक वर्ष तक पदोन्नति नहीं दी जा सकती। याचिका में कहा गया कि पदोन्नति से पहले आपत्ति भी दर्ज कराई गई थी, लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने अनावेदकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
