
जबलपुर। वन क्षेत्र में घूमने वाले शिकारियों व शरारती तत्वों के लोकेशन व मोबाइल डाटा की जानकारी प्रदान करने तथा कार्यवाही के दौरान वन अधिकारियों व कर्मचारियों की सुरक्षा के मुद्दे को गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट जस्टिस आनंद पाठक तथा जस्टिस बी पी शर्मा की युगलपीठ ने याचिका में केन्द्रीय गृह मंत्रालय को अनावेदक बनाते हुए नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
गौरतलब है कि धार जिले में बाओबाब के पेड़ को काटने, बिक्री करने तथा परिवहन की अनुमति दिये जाने के संबंध में प्रकाशित खबर को संज्ञान में लेते हुए मामले की सुनवाई जनहित याचिका के रूप की जा रही थी। याचिका की सुनवाई के दौरान युगलपीठ ने जैव विविधता बोर्ड को निर्देशित किया है कि प्रदेश में स्थित बाओबाब पेड़ की फोटो के साथ रिपोर्ट पेश करो। कोर्ट मित्र अधिवक्ता की तरफ से युगलपीठ को बताया गया था कि केन्द्र वन विभाग ने वाइल्ड लाइफ एक्ट के तहत वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो को स्टैटिक डाटा का उपयोग करने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा सभी जांच एजेंसी मोबाइल स्टैटिक डाटा का उपयोग कर सकती है।
कोर्ट मित्र की तरफ से पिछली सुनवाई के दौरान वन क्षेत्र में घूमने वाले शिकारियों व शरारती तत्वों के खिलाफ कार्यवाही के दौरान वन अधिकारियों व कर्मचारियों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया गया। उनकी तरफ से बताया गया कि वन अधिकारियों व कर्मचारियों को हथियार दिए जाते हैं, लेकिन उन हथियारों का इस्तेमाल करने पर इतनी पाबंदियाँ हैं कि जरूरत पड़ने पर भी वह उनका इस्तेमाल करने से डरते हैं कि उनके खिलाफ कार्यवाही प्रारंभ नही हो जाये। उन्हें सीआरपीसी की धारा 197 के तहत सुरक्षा दी जानी चाहिए।
इसके अलावा अपराध को रोकने के लिए वन अधिकारियों व कर्मचारियों को शिकारियों या बदमाशों की सीडीआर व टावर की लाइव मूवमेंट की जानकारी नहीं दी जाती है। ऐसी सुविधा और डेटा से जांच का तरीके आसान हो सकते है और जंगल व वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए रोकथाम के उपाय बेहतर हो सकें।
युगलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि पर्यावरण व वन्य वन्यजीवों के संरक्षण के लिए सभी हितधारकों को एक साझा मंच पर आना चाहिए। केंद्र और राज्य सरकार दोनों को उठाए गए मुद्दों के लिए सकारात्मक और ठोस समाधान निकालने चाहिए। युगलपीठ ने सुनवाई के बाद केन्द्रीय गृह मंत्रालय को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
