इंदौर: हीरानगर थाना क्षेत्र में तोड़फोड़ के आरोपियों को कथित रूप से नकली प्लास्टर बांधकर जुलूस निकालने के मामले में पुलिस जांच अब अस्पताल से लेकर थाने और जेल दाखिले तक पहुंच गई है. निजी अस्पताल के डॉक्टर के बयान दर्ज होने के बाद जांच अधिकारियों ने यह पता लगाना शुरू किया है कि आरोपियों की मेडिकल जांच से लेकर गिरफ्तारी और कोर्ट में पेशी तक पूरी प्रक्रिया में कहां कहां लापरवाही हुई.
मामला उस समय सामने आया था, जब हीरानगर थाना पुलिस ने कार में तोड़फोड़ और मारपीट के मामले में मयंक और शोभित को गिरफ्तार किया था. गिरफ्तारी के बाद पुलिस की ओर से आरोपियों के हाथ पैर में फ्रैक्चर होने की जानकारी दी गई थी. इसके बाद दोनों आरोपियों को प्लास्टर बंधी हालत में इलाके में घुमाया था. इस दौरान सामने आई तस्वीरों और वीडियो के बाद पूरे मामले पर सवाल उठे थे.
अब जांच में निजी अस्पताल के डॉक्टर से यह जानकारी जुटाई गई है कि आरोपियों की चोट और प्लास्टर को लेकर मेडिकल स्थिति क्या थी. इसके अलावा पुलिस अधिकारी यह भी देख रहे हैं कि आरोपियों को थाने से अस्पताल, कोर्ट और जेल तक ले जाने की प्रक्रिया में कौन कौन पुलिसकर्मी मौजूद थे और पूरी कार्रवाई किस आधार पर की गई. मामले में कुछ लोगों ने आरोप लगाया था कि पुलिसकर्मियों ने 20 हजार रुपए लेकर आरोपियों को नकली प्लास्टर बंधवाया और जुलूस निकाला, इन आरोपों की भी जांच की जा रही है. जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे कार्रवाई तय की जाएगी.
